You are currently viewing UP News: योगी आदित्यनाथ की अफसरों को दो टूक, बोले- पेंशन के लिए ‘ऑफिस-ऑफिस’ न भटके आम आदमी

UP News: योगी आदित्यनाथ की अफसरों को दो टूक, बोले- पेंशन के लिए ‘ऑफिस-ऑफिस’ न भटके आम आदमी

UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को साफ संदेश दिया है कि आम जनता को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। उन्होंने कहा कि आज भी कई बुजुर्गों को पेंशन जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए बार-बार कार्यालयों में भटकना पड़ता है। यह स्थिति प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा कि आम आदमी को ‘ऑफिस-ऑफिस’ धारावाहिक की तरह एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर तक भटकने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिले, नागरिक संतुष्टि हो प्राथमिकता

सीएम योगी ने कहा कि किसी नागरिक का सामान्य काम भी समय पर पूरा न होना पूरे प्रशासनिक सिस्टम की कार्यक्षमता पर सवाल उठाता है। अगर किसी की समस्या जानबूझकर लटकाई जाती है या कर्मचारी को उसका समाधान करने की सही जानकारी नहीं होती, तो दोनों ही स्थितियां गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि किसी बुजुर्ग, महिला, किसान, युवा या जरूरतमंद व्यक्ति को सरकारी कार्यालय से निराश होकर लौटना पड़े, तो लोक सेवा का उद्देश्य पूरा नहीं होता। अधिकारियों को समझना होगा कि नागरिकों की संतुष्टि ही उनके काम का असली रिपोर्ट कार्ड है।

सरकारी कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय हो, लापरवाही पर भी हो ध्यान

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिम्मेदार पद पर अयोग्य व्यक्ति का बैठना और उस पद पर किसी लापरवाह कर्मचारी का बने रहना, दोनों ही खतरनाक हैं। कई कर्मचारी अपने अधिकारों और पदोन्नति को लेकर सजग रहते हैं, लेकिन जिम्मेदारियों को निभाने में उतनी गंभीरता नहीं दिखाते। ऐसे में कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने, उनकी जिम्मेदारियां तय करने और उनके काम का नियमित मूल्यांकन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बार-बार शिकायत करने वालों से अलग सामान्य नागरिक की वास्तविक समस्या को समझकर उसका समय पर समाधान करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

मिशन कर्मयोगी के तहत अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को लखनऊ स्थित लोकभवन में मिशन कर्मयोगी के तहत आयोजित ‘साधना श्रृंखला’ की उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने क्षमता विकास आयोग से उत्तर प्रदेश में उपाम को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि एआई, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीक से शासन का तरीका तेजी से बदल रहा है। ऐसे में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को भी नई तकनीकों के मुताबिक प्रशिक्षित करना जरूरी है। तकनीक कामकाज को तेज और आसान बना सकती है, लेकिन जनता के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भावना कर्मचारियों में ही होनी चाहिए।

पंचायत और नगर निकायों को मजबूत बनाने की जरूरत

सीएम योगी ने ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों, नगर पालिका परिषदों और नगर निगमों में काम करने वाले कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए स्थानीय निकायों को मजबूत, जवाबदेह और जनता के प्रति संवेदनशील बनाना जरूरी है। पंचायतें और नगर निकाय शासन की बुनियादी इकाइयां हैं। जब इनकी कार्यक्षमता बेहतर होगी, तभी सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सही तरीके से पहुंच सकेगा।

सही पद पर सही व्यक्ति की तैनाती पर जोर

मुख्यमंत्री ने ‘राइट पर्सन फॉर द राइट रोल’ यानी सही काम के लिए सही व्यक्ति की तैनाती की व्यवस्था प्रभावी बनाने की बात कही। उन्होंने क्षमता विकास आयोग से उपाम के साथ मिलकर अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रदर्शन, उपलब्धियों और अच्छे कामों को उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) तथा पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम करने का आग्रह किया। इससे कर्मचारियों की योग्यता के हिसाब से जिम्मेदारी तय करने और सही व्यक्ति को सही पद पर नियुक्त करने में मदद मिलेगी।

यूपी के 19.26 लाख सरकारी कर्मचारी कर्मयोगी पोर्टल से जुड़े

योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मिशन कर्मयोगी सरकारी कामकाज की संस्कृति बदलने का राष्ट्रीय अभियान है। उत्तर प्रदेश में 19.26 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारी आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत हैं। ये कर्मचारी अब तक करीब चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे कर चुके हैं। वहीं, प्रदेश के 334 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़ चुके हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण की सफलता सिर्फ आंकड़ों से नहीं मापी जानी चाहिए। यह देखना जरूरी है कि प्रशिक्षण के बाद फैसले कितने बेहतर हुए, सरकारी प्रक्रियाएं कितनी आसान बनीं और आम लोगों को कितनी अच्छी सेवाएं मिलीं।

सड़क निर्माण का उदाहरण देकर समझाई अधिकारियों की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में सड़क निर्माण का एक उदाहरण देते हुए अधिकारियों की व्यावहारिक समझ पर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि एक सड़क को दो लेन से चार लेन बनाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अभियंताओं ने सड़क को जमीन से करीब तीन मीटर ऊंचा बना दिया। इससे आसपास रहने वाले लोगों का आवागमन प्रभावित होने लगा। शिकायत मिलने पर मुख्यमंत्री खुद मौके पर पहुंचे और सड़क को उसके मूल उद्देश्य के मुताबिक बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल डिग्री हासिल कर लेना या नियुक्ति पत्र मिल जाना किसी को योग्य अभियंता या सक्षम अधिकारी नहीं बनाता। अधिकारियों को नई तकनीक अपनाने, परिस्थितियों को समझने और आम जनता की जरूरतों के हिसाब से फैसले लेने की क्षमता विकसित करनी होगी। इसी उद्देश्य से उपाम को आधुनिक तकनीक और क्षमता विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

Spread the love

Leave a Reply