T20 World Cup Trophy: भारतीय क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक टी20 वर्ल्ड कप जीत का जश्न अभी जारी ही था कि इस पर अब राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव के ट्रॉफी के साथ हनुमान मंदिर जाकर दर्शन करने को लेकर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इस मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं ने खेल में धर्म की एंट्री का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि क्रिकेट जैसी राष्ट्रीय उपलब्धि को किसी एक धर्म से जोड़ना उचित नहीं है, क्योंकि यह जीत पूरे देश की है।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई का तीखा बयान
इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि भारत एक बहुधर्मी देश है और वर्ल्ड कप की ट्रॉफी पूरे देश की उपलब्धि है, न कि किसी एक खिलाड़ी या विचारधारा की।दलवई ने सवाल उठाते हुए कहा कि ट्रॉफी लेकर मंदिर जाने की आवश्यकता क्या थी। उनके अनुसार इस मुद्दे को पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने सही तरीके से उठाया है। उन्होंने कहा कि खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को धर्म और राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।
ट्रॉफी सिर्फ मंदिर ही क्यों ले जाई गई?
हुसैन दलवई ने आगे कहा कि यदि ट्रॉफी को किसी धार्मिक स्थल पर ले जाना ही था, तो केवल हनुमान मंदिर ही क्यों चुना गया। उन्होंने सवाल किया कि ट्रॉफी को मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे क्यों नहीं ले जाया गया।उनका कहना था कि भारत में विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं और क्रिकेट टीम भी पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती है। ऐसे में किसी एक धार्मिक स्थल को प्राथमिकता देना विवाद को जन्म दे सकता है।
कीर्ति आजाद ने 1983 वर्ल्ड कप का दिया उदाहरण
इस विवाद की शुरुआत टीएमसी सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद के सोशल मीडिया पोस्ट से हुई थी। उन्होंने 1983 के वर्ल्ड कप की याद दिलाते हुए वर्तमान टीम के इस कदम की आलोचना की।आजाद ने कहा कि जब कपिल देव की कप्तानी में भारत ने 1983 का वर्ल्ड कप जीता था, तब टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी धर्मों के खिलाड़ी शामिल थे। उस समय इस तरह की धार्मिक चर्चा नहीं हुई थी और जीत को पूरी तरह राष्ट्रीय उपलब्धि के रूप में देखा गया था।
खिलाड़ियों के धार्मिक स्थलों को लेकर भी उठे सवाल
कीर्ति आजाद ने अपने बयान में यह भी कहा कि यदि ट्रॉफी को धार्मिक स्थलों पर ले जाने की परंपरा शुरू की जाती है, तो फिर सभी धर्मों के खिलाड़ियों को भी ऐसा करने का अवसर मिलना चाहिए।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि टीम के खिलाड़ी मोहम्मद सिराज या संजू सैमसन कभी ट्रॉफी लेकर अपने धार्मिक स्थलों पर नहीं गए। उनका कहना था कि भारतीय टीम पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती है और इसे किसी एक धर्म या परिवार से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर भी साधा निशाना
क्रिकेट विवाद के साथ-साथ हुसैन दलवई ने ओम बिरला को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें अपने पद के अनुरूप निष्पक्ष रहना चाहिए।दलवई का आरोप है कि उनका व्यवहार सत्ता पक्ष की ओर झुका हुआ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें लगता है कि वे पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रह पा रहे हैं, तो उन्हें स्वयं ही पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।इस तरह टी20 वर्ल्ड कप जीत का जश्न अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है और खेल, धर्म तथा राजनीति के बीच संतुलन को लेकर नई चर्चा छिड़ गई है।

