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West Bengal Election: दूसरे चरण से पहले हिंसा का तांडव, आयोग ने 1000 उपद्रवियों को दबोचा

West Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का रण सज चुका है, लेकिन मतदान से पहले राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर है। 29 अप्रैल को 8 जिलों की 142 सीटों पर होने वाले मतदान से पहले सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की जा रही है। चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए पिछले 24 घंटों में 1000 से अधिक असामाजिक तत्वों को गिरफ्तार किया है, ताकि मतदाता बिना किसी डर के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

चुनावी समर और जगद्दल में बमबाजी की हिंसक वारदात

उत्तर 24 परगना के जगद्दल इलाके में उस वक्त तनाव फैल गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित रैली से महज कुछ घंटे पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भाजपा (BJP) के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। इस हिंसक झड़प के दौरान हुई बमबाजी की घटना में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। राजनीतिक वर्चस्व की इस जंग ने स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ा दी है, जिसके बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

हालीशहर में फायरिंग और राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर हमला

हिंसा का सिलसिला यहीं नहीं थमा; 27 अप्रैल को हालीशहर नगरपालिका क्षेत्र के खासबाटी में गोलीबारी की सनसनीखेज घटना सामने आई। इस हमले में 30 वर्षीय तृणमूल कार्यकर्ता प्रोसेनजीत मौलिक उर्फ राजा को गोली लगी, जिन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। चुनावी रंजिश और हिंसा की इन घटनाओं ने साबित कर दिया है कि दूसरे चरण के मतदान से पहले जमीन पर स्थिति कितनी संवेदनशील बनी हुई है।

भाटपारा में गोलीबारी और सीआईएसएफ जवान का जख्मी होना

उत्तर 24 परगना का भाटपारा क्षेत्र एक बार फिर गोलियों की गूंज से दहल उठा। यहाँ भाजपा उम्मीदवार के निवास के बाहर हुई फायरिंग में ड्यूटी पर तैनात सीआईएसएफ (CISF) का एक जवान घायल हो गया। इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक तृणमूल पार्षद सहित चार लोगों को हिरासत में लिया है। सुरक्षा बलों पर हमले की इस घटना ने निर्वाचन आयोग को सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया है।

हुगली में जनप्रतिनिधियों पर निशाना और वाहनों में तोड़फोड़

हुगली जिले के गोगहाट में भी अराजकता का माहौल देखा गया। आरामबाग से सांसद मिताली बाग ने आरोप लगाया कि जब वे अभिषेक बनर्जी की जनसभा में हिस्सा लेने जा रही थीं, तब भाजपा समर्थकों ने उनकी गाड़ी पर हमला कर तोड़फोड़ की। नेताओं और सांसदों पर बढ़ते हमलों ने शांतिपूर्ण मतदान की संभावनाओं पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, जिससे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

निर्वाचन आयोग की कठोर कार्रवाई

बढ़ते हिंसक मामलों को देखते हुए चुनाव आयोग ने सुरक्षा बलों की अतिरिक्त कंपनियां तैनात करने का निर्णय लिया है। आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि मतदान प्रक्रिया में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। संवेदनशील बूथों पर कड़ी निगरानी के लिए ड्रोन और सीसीटीवी का सहारा लिया जा रहा है। अब सबकी निगाहें 29 अप्रैल पर टिकी हैं, जहाँ प्रशासन के सामने निष्पक्ष और हिंसा मुक्त चुनाव संपन्न कराना एक अग्निपरीक्षा के समान होगा।

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