You are currently viewing RSS Event in Jamia: जामिया में ‘युवा कुंभ’ पर रार! RSS के कार्यक्रम का छात्रों ने किया पुरजोर विरोध, कैंपस में भारी तनाव

RSS Event in Jamia: जामिया में ‘युवा कुंभ’ पर रार! RSS के कार्यक्रम का छात्रों ने किया पुरजोर विरोध, कैंपस में भारी तनाव

RSS Event in Jamia: देश की प्रतिष्ठित जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी एक बार फिर छात्र राजनीति और वैचारिक टकराव का केंद्र बन गई है। मंगलवार को विश्वविद्यालय के FET ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित ‘युवा कुंभ’ कार्यक्रम को लेकर जमकर बवाल हुआ। ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) और अन्य छात्र संगठनों के उग्र प्रदर्शन के कारण सुबह 10:30 बजे शुरू होने वाला यह कार्यक्रम समय पर प्रारंभ नहीं हो सका, जिससे पूरे परिसर में अनिश्चितता और तनाव का माहौल व्याप्त है।

वैचारिक मतभेद और ‘युवा कुंभ’ के आयोजन पर छात्रों का तीखा आक्रोश

आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस युवा कुंभ कार्यक्रम का विरोध कर रहे छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी छात्रों का नेतृत्व कर रहे AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन) ने आरोप लगाया कि कैंपस के भीतर एक विशेष विचारधारा को जबरन थोपने की कोशिश की जा रही है। छात्रों का कहना है कि जहां एक ओर आम छात्र संगठनों को लोकतांत्रिक चर्चाओं के लिए अनुमति नहीं दी जाती, वहीं आरएसएस जैसे संगठन को भव्य ऑडिटोरियम सौंपना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है।

विश्वविद्यालय के ‘संघीकरण’ के खिलाफ छात्र एकजुटता और वैचारिक प्रतिरोध

प्रदर्शन के दौरान छात्र समूहों ने जामिया प्रशासन पर ‘दोहरे मापदंड’ अपनाने का आरोप लगाया। आइसा के आधिकारिक बयान के अनुसार, शिक्षण संस्थानों का इस्तेमाल सांप्रदायिक एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। छात्रों का तर्क है कि जामिया की ऐतिहासिक और धर्मनिरपेक्ष विरासत को कमजोर करने वाले किसी भी कदम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस वैचारिक प्रतिरोध के दौरान छात्रों ने साफ कर दिया कि विश्वविद्यालयों को नफरत की राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाना चाहिए।

छात्र संगठनों का संयुक्त मोर्चा और सांप्रदायिकता के खिलाफ साझा संघर्ष

इस विरोध प्रदर्शन में आइसा को SFI (स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) का भी कड़ा समर्थन मिला है। एसएफआई ने एक साझा बयान जारी कर कहा कि जामिया के छात्र विश्वविद्यालय के ‘संघीकरण’ की प्रक्रिया के खिलाफ पूरी तरह एकजुट हैं। छात्र संगठनों का मानना है कि सार्वजनिक विश्वविद्यालयों का उपयोग ऐसी ताकतों को मंच देने के लिए नहीं होना चाहिए जो समाज में विभाजन पैदा करती हैं। एसएफआई के कार्यकर्ताओं ने इसे नफरत की राजनीति के विरुद्ध साझा संघर्ष करार दिया और प्रशासन से जवाबदेही की मांग की।

जामिया प्रशासन की अनुमति पर सवाल

फिलहाल, इस हंगामे के बीच कार्यक्रम के स्थगन या पुनर्निर्धारण को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है। प्रदर्शनकारी छात्र ऑडिटोरियम के बाहर डटे हुए हैं, जिससे स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। सुरक्षा के मद्देनजर कैंपस में अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती की गई है। यह विवाद न केवल जामिया, बल्कि देश के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में अभिव्यक्ति की आजादी और वैचारिक स्वायत्तता की बहस को एक बार फिर गरमा दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गतिरोध को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाता है।

Spread the love

Leave a Reply