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West Bengal violence: पश्चिम बंगाल में सियासी उबाल! टीएमसी नेताओं पर हमलों को लेकर महबूबा मुफ्ती ने भाजपा पर साधा निशाना

West Bengal violence: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल एक बार फिर पूरी तरह गरमा गया है. हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के शीर्ष नेताओं पर सिलसिलेवार हिंसक हमलों की घटनाएं सामने आई हैं. सबसे पहले साउथ 24 परगना के सोनारपुर इलाके में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर हिंसक हमला किया गया, जहां वे चुनावी हिंसा के पीड़ितों से मिलने पहुंचे थे. इसके बाद हुगली में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी को भी निशाना बनाने की खबर आई. इन हमलों से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसके बाद राज्य में राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है.

पूर्व मुख्यमंत्री का तीखा प्रहार

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने इन हमलों को लेकर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने पश्चिम बंगाल की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता जाहिर की है. मुफ्ती ने कहा कि जब से वहां राजनीतिक समीकरण बदले हैं, तब से कानून और व्यवस्था का ढांचा लगातार ध्वस्त हो रहा है. उन्होंने विपक्षी नेताओं की सुरक्षा को लेकर सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं.

स्वायत्त संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप

भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए महबूबा मुफ्ती ने सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस जैसी निष्पक्ष और स्वतंत्र संस्थाएं अब पूरी तरह से राजनीतिक हितों को साधने का जरिया बन चुकी हैं. मुफ्ती ने कहा, “अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी जैसे प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर हुए जानलेवा और हिंसक हमलों को सरेआम नजरअंदाज किया जा रहा है.” उन्होंने जनता से सीधे तौर पर सवाल करते हुए पूछा कि क्या लोगों ने इसी तरह के बदलाव और अशांति के लिए मतदान किया था? निश्चित रूप से बंगाल की जनता का फैसला ऐसा नहीं था.

गरमाई राज्य की राजनीति

महबूबा मुफ्ती के इस कड़े बयान के बाद पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में एक नया विवाद छिड़ गया है. विपक्ष लगातार कानून-व्यवस्था और राजनीतिक प्रतिशोध के मुद्दों को लेकर सरकार की घेराबंदी कर रहा है. टीएमसी नेताओं पर हुए इन हमलों के कारण पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी आक्रोश है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन हिंसक घटनाओं और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाओं के चलते आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और टकराव का यह दौर और ज्यादा उग्र हो सकता है.

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