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Muzaffarpur Hospital Fire: मुजफ्फरपुर के बड़े अस्पताल में आधी रात मौत का तांडव, कैसे बुझ गए 3 चिराग?

Muzaffarpur Hospital Fire: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ शहर के सबसे बड़े निजी अस्पतालों में से एक, प्रसाद अस्पताल में अचानक भीषण आग लग गई। इस भयानक अग्निकांड की चपेट में आने से अस्पताल में उपचाराधीन तीन गंभीर मरीजों की असमय मौत हो गई। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त अस्पताल के अत्यंत संवेदनशील आईसीयू (ICU – गहन चिकित्सा इकाई) वार्ड में लगभग 13 से 15 मरीज वेंटिलेटर और अन्य लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर भर्ती थे, जिनकी जान पर अचानक बन आई।

शॉर्ट सर्किट के कारण आईसीयू में फैला धुआं और रेस्क्यू ऑपरेशन

शुरुआती जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अस्पताल के भीतर यह हादसा संभवतः बिजली के शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) होने की वजह से हुआ। आग लगने के तुरंत बाद पूरे आईसीयू वार्ड सहित पूरी इमारत में तेजी से दमघोंटू और जहरीला धुआं फैल गया। पहले से ही वेंटिलेटर और गंभीर अवस्था में इलाज करा रहे मरीजों की हालत इस धुएं के कारण और ज्यादा बिगड़ गई। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग (Fire Department) की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और फायर फाइटर्स ने युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी मरीजों को शीशे तोड़कर बाहर निकाला। हालांकि, दुर्भाग्यवश 3 मरीजों को नहीं बचाया जा सका, जबकि शेष बचे मरीजों को तत्काल प्रभाव से एम्बुलेंस के जरिए नजदीकी अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया गया।

सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव का फूटा गुस्सा और सख्त रुख

अस्पताल में हुई इस लापरवाही और दर्दनाक मौत की घटना पर बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने गहरी संवेदना और तीव्र नाराजगी व्यक्त की है। हादसे की खबर मिलते ही मंत्री का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने दोषियों के खिलाफ बिना किसी ढिलाई के कड़े से कड़ा दंडात्मक कदम उठाने की बात कही। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था और चिकित्सा क्षेत्र की खामियों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य में नियमों को ताक पर रखकर अवैध और असुरक्षित चिकित्सा संस्थान बेरोकटोक संचालित हो रहे हैं।

मानकों की अनदेखी करने वाले अस्पतालों को बंद करने की चेतावनी

कैबिनेट मंत्री रामकृपाल यादव ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “आजकल गली-मोहल्लों में कुकुरमुत्ते की तरह बिना किसी नियम-कायदे के निजी अस्पताल खुल गए हैं। कोई भी रसूखदार व्यक्ति बिना सुरक्षा मानकों का पालन किए अस्पताल खोलकर बैठ जाता है और मासूम लोगों की जिंदगी से खेलता है।” उन्होंने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा कि जो भी चिकित्सालय तय मानकों और फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से सील कर बंद कर देना चाहिए क्योंकि किसी भी निर्दोष नागरिक की जान इस तरह की प्रशासनिक लापरवाही की भेंट नहीं चढ़नी चाहिए।

तीमारदारों की आपबीती और मौके पर मची चीख-पुकार

हादसे के वक्त अस्पताल परिसर में चारों तरफ चीख-पुकार और अफरातफरी का माहौल था। अस्पताल में भर्ती एक पीड़ित मरीज के तीमारदार (परिजनों) ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया, “जब मैं अपने घर पर था, तब मुझे अचानक अस्पताल में आग लगने की खबर मिली। मैं बदहवास हालत में दौड़ते हुए मौके पर पहुंचा। अस्पताल के भीतर भयंकर धुआं भरा था। मैंने किसी तरह अपने मरीज को वहां से बाहर निकाला और तुरंत दूसरे चिकित्सालय में भर्ती कराया, जहाँ अब उनकी स्थिति स्थिर और नियंत्रण में बनी हुई है।” फिलहाल स्थानीय प्रशासन इस पूरे अग्निकांड की उच्चस्तरीय जांच में जुट गया है।

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