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Shashi Tharoor vs Pawan Khera: पीएम मोदी की तारीफ कर फिर फंसे शशि थरूर, पवन खेड़ा और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज

Shashi Tharoor vs Pawan Khera: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर एक बार फिर अपनी ही पार्टी के भीतर आंतरिक विरोध का सामना कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मोर्चों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति की सराहना करना थरूर के लिए नया राजनीतिक संकट बन गया है। इस बार जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर पीएम मोदी के कथित कड़े रुख का समर्थन करने पर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने उन पर तीखा तंज कसा है। खेड़ा ने उपहास उड़ाते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि थरूर का मोदी के प्रति आदर इस कदर बढ़ गया है कि वे अब वह बातें भी सुन लेते हैं जो पीएम ने कभी कही ही नहीं। उन्होंने कहा कि थरूर जिस ‘सख्त कूटनीति’ का दावा कर रहे हैं, उसका आधिकारिक रिकॉर्ड में दूर-दूर तक कोई जिक्र नहीं है।

शशि थरूर का पलटवार: मीडिया रिपोर्टों का हवाला देकर कहा- मैं अपने बयानों पर पूरी तरह कायम हूँ

पवन खेड़ा के तीखे हमलों का जवाब देते हुए तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने पार्टी के भीतर उठ रहे असंतोष के सुरों पर अपनी स्थिति साफ की है। थरूर ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में कहा कि वे केवल उन्हीं जानकारियों को साझा कर रहे थे जो प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों और मीडिया रिपोर्टों में प्रमुखता से प्रकाशित हुई थीं। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “मैं जो कुछ भी पढ़ता हूँ, उसे पूरी प्रामाणिकता के साथ याद रखता हूँ। मेरे लंबे सार्वजनिक जीवन में आज तक किसी ने भी मुझ पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का लांछन नहीं लगाया है।” थरूर ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता को लेकर दिया गया उनका बयान पूरी तरह से सत्य और मीडिया के तथ्यों पर आधारित है।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर छिड़ा सियासी घमासान: गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर राजनीति करने से नाराज हुए कांग्रेस सांसद

शशि थरूर ने देश के आंतरिक राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर समुद्री सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर हो रही बयानबाजी पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि हालिया अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के दौरान तीन भारतीय नाविकों की दुखद मृत्यु हो चुकी है। ऐसे संवेदनशील समय में नागरिकों की रक्षा जैसे राष्ट्रीय हित के मुद्दे को राजनीतिक विवाद का अखाड़ा बना देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। थरूर ने तर्क दिया कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर तैनात नागरिक कोई सैनिक नहीं होते, इसलिए किसी भी वैश्विक सैन्य कार्रवाई में उन्हें निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग इस मानवीय संकट पर चिंता व्यक्त करने के बजाय केवल राजनीति चमकाना चाहते हैं, यह उनकी संकीर्ण सोच को दर्शाता है।

भाजपा ने राहुल गांधी की राजनीति पर उठाया सवाल: प्रदीप भंडारी बोले- थरूर ने उजागर किया कांग्रेस का दोहरा चेहरा

शशि थरूर और पवन खेड़ा के बीच छिड़े इस वाकयुद्ध में अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की भी एंट्री हो गई है। भाजपा ने थरूर के बयान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सफल विदेश नीति और वैश्विक धाक की खुली स्वीकारोक्ति बताया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शशि थरूर ने वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत स्थिति को स्वीकार कर सीधे तौर पर राहुल गांधी की नकारात्मक राजनीति को बेनकाब कर दिया है। भंडारी ने दावा किया कि जब भी देश के स्वाभिमान और राष्ट्रीय हितों की रक्षा की बात आती है, तब पीएम मोदी अग्रिम पंक्ति में खड़े दिखाई देते हैं, जबकि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व हमेशा देश विरोधी और नकारात्मक रुख अपनाने में व्यस्त रहता है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ से शुरू हुई थी पार्टी में दूरियां: डैमेज कंट्रोल में जुटी कांग्रेस, थरूर की बढ़ी स्वायत्तता

शशि थरूर और कांग्रेस आलाकमान के बीच वैचारिक मतभेद और दूरियां कोई नई बात नहीं हैं, बल्कि इसकी पटकथा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान ही लिख दी गई थी। केंद्र सरकार ने जब अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत का मजबूत पक्ष रखने के लिए एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया था, तब उसकी कमान संभालने के लिए विपक्ष के चेहरे के रूप में शशि थरूर को चुना गया था। ध्यान देने वाली बात यह है कि कांग्रेस पार्टी द्वारा सरकार को भेजे गए आधिकारिक नामों की सूची में थरूर का नाम शामिल नहीं था। इसके बावजूद, दलगत राजनीति से ऊपर उठकर थरूर ने न केवल उस सरकारी आमंत्रण को स्वीकार किया, बल्कि वैश्विक मंच पर जाकर देश का पक्ष बेहद मजबूती से रखा, जिसके बाद से ही पार्टी के भीतर उनके खिलाफ असंतोष लगातार गहराता जा रहा है।

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