International Yoga Day 2026: आज पूरी दुनिया 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। वर्तमान समय में, जब वैश्विक स्तर पर तनाव, युद्ध और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं, तब योग की महत्ता पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई है। ‘योग’ शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के ‘युज’ धातु से हुई है, जिसका अर्थ है ‘शामिल होना’ या ‘एकत्र होना’। यह केवल एक शारीरिक गतिविधि या कसरत नहीं है, बल्कि शरीर, मस्तिष्क और चेतना को आपस में जोड़ने वाली एक संपूर्ण जीवन-पद्धति है। महान योग गुरु बीकेएस अयंगर के अनुसार, योग हमें रोजमर्रा की जिंदगी में एक संतुलित दृष्टिकोण विकसित करने और अपने कार्यों को अधिक कुशलता से करने की अद्भुत क्षमता प्रदान करता है।
प्राचीन भारतीय योग परंपरा का इतिहास
शुरुआती दौर में योग मुख्य रूप से भारत और उपमहाद्वीप के कुछ हिस्सों तक ही सीमित था, क्योंकि इसकी जड़ें हमारे प्राचीन ग्रंथों और उपनिषदों में मिलती हैं। लगभग 5,000 साल पुरानी इस भारतीय शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक पद्धति का मूल उद्देश्य मन, शरीर और आत्मा में सकारात्मक बदलाव लाना है। पहले पश्चिमी देश इसे केवल शरीर को सुडौल बनाने का साधन मानते थे, लेकिन भारत के प्रमुख योग संस्थानों और आचार्यों के निरंतर प्रयासों ने इस भ्रांति को दूर किया। आज पूरी दुनिया यह स्वीकार कर चुकी है कि यह प्राचीन विद्या गंभीर बीमारियों से लड़ने और एक शांत, स्वस्थ व खुशहाल जीवन का आधार तैयार करने में अत्यधिक फायदेमंद है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का ऐतिहासिक प्रस्ताव
योग को विश्व पटल पर आधिकारिक पहचान दिलाने का श्रेय संयुक्त राष्ट्र की घोषणा को जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 11 दिसंबर 2014 को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित कर हर साल 21 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। भारत द्वारा रखे गए इस मसौदा प्रस्ताव को रिकॉर्ड 175 सदस्य देशों ने अपना समर्थन दिया था। यह संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में पहली बार था जब किसी देश की पहल को महज 90 दिनों से भी कम समय में न केवल स्वीकार किया गया, बल्कि इतने बड़े स्तर पर सह-प्रायोजक भी मिले। तब से लेकर आज तक, हर साल करोड़ों लोग बेहतर स्वास्थ्य के लिए इस अभियान से जुड़ रहे हैं।
21 जून की तारीख का आध्यात्मिक महत्व
संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, इस वैश्विक उत्सव के लिए 21 जून की तारीख का चयन बेहद सोच-समझकर किया गया था। यह दिन ‘समर सॉल्स्टिस’ (ग्रीष्म संक्रांति) का होता है, जो उत्तरी गोलार्ध में साल का सबसे लंबा दिन माना जाता है। दुनिया की कई संस्कृतियों में इस दिन को प्रकाश, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। भारतीय ज्योतिषीय और आध्यात्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन के बाद सूर्य देव ‘दक्षिणायन’ मार्ग पर प्रवेश करते हैं। दक्षिणायन के इस पावन काल को साधना, गहन ध्यान, आत्ममंथन और आंतरिक शांति प्राप्त करने के लिए सबसे उपयुक्त और फलदायी समय माना गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) का दृष्टिकोण
इस वैश्विक मुहिम की नींव सितंबर 2014 में पड़ी थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र को संबोधित करते हुए इसका प्रस्ताव रखा था। पीएम मोदी ने विश्व मंच से कहा था, “योग हमारी पुरातन पारंपरिक और अमूल्य देन है। यह मन व शरीर, विचार व कर्म, तथा मानव व प्रकृति के बीच अद्भुत सामंजस्य का मूर्त रूप है।” संयुक्त राष्ट्र में भारत के तत्कालीन राजदूत अशोक मुखर्जी ने इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से पेश किया था। आज यह प्रयास एक जन-आंदोलन बन चुका है, जो संपूर्ण मानवता को कल्याण, निरोगी काया और वसुधैव कुटुंबकम के एक सूत्र में पिरो रहा है।

