लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में सोमवार (22 जून) को एक बड़ा हादसा हो गया। यहाँ एक तीन मंजिला इमारत में भीषण आग लगने के कारण झुलसकर 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 9 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लापरवाही बरतने वाले चार वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए बिल्डिंग के मालिकों समेत चार दोषियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। इस हृदयविदारक घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है।
लखनऊ बिल्डिंग फायर एक्सीडेंट के 10 मुख्य अपडेट्स
इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन और सरकार पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रही है। लखनऊ फायर ट्रैजेडी से जुड़े 10 बड़े घटनाक्रम इस प्रकार हैं:
- सीएम की हाई-लेवल मीटिंग: मुख्यमंत्री ने अपने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर आला अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की।
- विशेष जांच दल का गठन: मामले की तह तक जाने के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया गया है।
- समय सीमा तय: एसआईटी को पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट 7 दिनों के भीतर सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
- वीवीआईपी दौरा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और स्थानीय सांसद व देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दुर्घटनास्थल का मुआयना किया।
- अवैध निर्माण का पुराना इतिहास: हादसे का शिकार हुई इस त्रि-स्तरीय इमारत को साल 2016 में ही गिराने (ध्वस्त करने) का आदेश हुआ था।
- आदेश का निरस्तीकरण: महज दो महीने के भीतर ही उस ध्वस्तीकरण आदेश को संदिग्ध परिस्थितियों में रद्द कर दिया गया था।
- दोषियों की धरपकड़: पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भवन मालिकों सहित चार आरोपियों को अरेस्ट कर लिया है।
- घायलों की स्थिति: अस्पताल में भर्ती 11 घायलों में से 9 को प्राथमिक उपचार के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है।
- नक्शे का उल्लंघन: जांच में सामने आया कि बिल्डिंग का मैप (मानचित्र) तो पास था, लेकिन निर्माण पूरी तरह उसके विपरीत (अवैध) किया गया था।
- मुआवजे की घोषणा: शासन द्वारा मृतकों के आश्रितों को 5-5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का एलान किया गया है।
अवैध निर्माण और एलडीए की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस तीन मंजिला इमारत में सोमवार को यह भयावह अग्निकांड हुआ, उसे साल 2016 में ही जमींदोज किया जाना था। उस दौरान लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने इसके अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण की नोटिस जारी की थी, लेकिन रहस्यमयी तरीके से दो महीने के भीतर ही उस आदेश को पलट दिया गया। अब एलडीए की फाइलों और पुराने दस्तावेजों ने विभाग की कार्यशैली को गंभीर कटघरे में खड़ा कर दिया है कि आखिर इतने बड़े उल्लंघन को नजरअंदाज क्यों किया गया।
दोषियों और लापरवाह अफसरों पर प्रशासनिक गाज
लखनऊ अग्निकांड के बाद सूबे के मुखिया के तेवर बेहद कड़े हैं। हादसे की जवाबदेही तय करते हुए जानकीपुरम में बिजली विभाग के अधिकारी गौरव कुमार, इंदिरा नगर फायर स्टेशन के अधिकारी कमलेंद्र कुमार सिंह, एलडीए के सहायक अभियंता अनिल कुमार और कनिष्ठ अभियंता प्रमोद पांडेय को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज कर चार लोगों—राम कृष्ण उपाध्याय (43), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (62), तुषार कृष्ण जायसवाल (31) और सुरेश कुमार साहू को गिरफ्तार किया है। इनमें से उपाध्याय, शुक्ला और जायसवाल इस अवैध इमारत के संयुक्त स्वामी (मालिक) हैं।
पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे का मरहम
इस राष्ट्रीय आपदा की घड़ी में केंद्र और राज्य सरकार पीड़ितों के साथ खड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। इसी क्रम में, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी राज्य सरकार की ओर से मृतकों के आश्रितों को 5-5 लाख रुपये और घायलों के सर्वोत्तम इलाज के साथ 50-50 हजार रुपये की विशेष सहायता राशि देने की घोषणा की है।

