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Lucknow Fire: “तार छूटा और मैं सीधे नीचे गिरी…” लखनऊ हादसे में मौत के मुंह से लौटी छात्रा की आपबीती सुन कांप उठेगी रूह

लखनऊ। लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में हुए भीषण कोचिंग अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। जिस समय तीन मंजिला इमारत आग की लपटों और काले धुएं के गुबार में तब्दील हो रही थी, उस वक्त अंदर का नजारा किसी नरक से कम नहीं था। अपनी जान बचाने के लिए तड़पते छात्र-छात्राओं को जब बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला, तो उन्होंने इमारत की खिड़कियों से छलांग लगानी शुरू कर दी। कोई बिजली के झूलते तारों के सहारे नीचे आ रहा था, तो कोई ड्रेनेज पाइप को पकड़कर मौत को चकमा देने की कोशिश कर रहा था। इस खौफनाक मंजर के बीच वहां मौजूद छात्रा लवप्रीत किसी तरह जिंदा बच निकलने में कामयाब रही, जिसने अस्पताल के बिस्तर से उस खौफनाक मंजर की दास्तान बयां की है।

केजीएमयू ट्रामा सेंटर में जिंदगी की जंग

इस रूह कंपा देने वाले हादसे का शिकार हुई छात्रा लवप्रीत इस समय लखनऊ के केजीएमयू (किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी) के ट्रामा सेंटर में उपचाराधीन है। इस हादसे में उसके पैर की हड्डी बुरी तरह टूट गई है। शारीरिक पीड़ा से कहीं ज्यादा गहरा जख्म लवप्रीत के जेहन पर लगा है, जहां से उस भयावह आग की तस्वीरें हटने का नाम नहीं ले रही हैं।

अस्पताल के बेड पर दर्द से तड़पते हुए लवप्रीत ने बताया कि अगर उस पूरी बहुमंजिला इमारत में आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था होती, तो शायद आज 15 हंसते-खेलते छात्रों की जान नहीं जाती। यह हादसा पूरी तरह से कोचिंग संचालकों और भवन मालिक की लापरवाही का नतीजा है, जिन्होंने सुरक्षा मानकों को ताक पर रख दिया था।

दम घोंटू काले धुएं का विकराल तांडव

लवप्रीत ने उस भयावह पल को याद करते हुए बताया कि कोचिंग सेंटर के निचले हिस्से में आग लगते ही कुछ ही सेकंड के भीतर जहरीले और घने काले धुएं ने पूरी ऊपरी मंजिल को अपनी आगोश में ले लिया था। चारों तरफ इतना घुटन भरा धुआं फैल चुका था कि छात्रों का दम घुटने लगा और आंखों के सामने पूरी तरह अंधेरा छा गया।

घबराहट में किसी को समझ नहीं आ रहा था कि वे खुद को बचाने के लिए किस दिशा में भागें। लवप्रीत और उसके साथियों ने जान बचाने के लिए ऊपर छत (टेरेस) की तरफ दौड़ लगाई, लेकिन वहां पहुंचते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई—छत पर जाने वाला मुख्य दरवाजा बाहर से पूरी तरह लॉक था। रास्ता बंद होने के कारण दर्जनों छात्र उसी दम घोंटू धुएं के गुब्बारे के बीच असहाय होकर फंस गए।

मौत के मुहाने से जिंदगी की छलांग

जब जीवन बचाने का कोई भी रास्ता शेष नहीं बचा, तो लवप्रीत ने खिड़की से बाहर लटक रहे बिजली और ब्रॉडबैंड के पतले तारों को अपनी आखिरी उम्मीद बनाया। उसने बताया कि फेफड़ों में भरते धुएं और मौत के डर के बीच उसने खिड़की से बाहर निकलकर तारों को पकड़ा और नीचे उतरने का प्रयास करने लगी।

किंतु, हड़बड़ाहट और तारों के कमजोर होने के कारण उसका हाथ फिसल गया और वह सीधे कंक्रीट के फर्श पर आ गिरी। भारी चोट आने के कारण वह उठ नहीं सकी, लेकिन सही समय पर लोगों ने उसे अस्पताल पहुँचाया। लवप्रीत आज अपनी सांसें चलने के लिए ईश्वर का बार-बार धन्यवाद कर रही है, लेकिन उसकी आंखें अपने उन सहपाठियों को याद कर नम हैं जो इस आग की लपटों में झुलसकर हमेशा के लिए सो गए।

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