कानपुर। लखनऊ के अलीगंज (पुरनिया) में एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से 15 छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना पर मुख्यमंत्री के सख्त रुख अख्तियार करते ही कानपुर प्रशासन और कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) का अमला पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। उपाध्यक्ष अंकुर कौशिक के कड़े निर्देशों के बाद केडीए के प्रवर्तन दस्ते ने सोमवार शाम शहर के विभिन्न इलाकों में औचक छापेमारी की। इस दौरान नियमों और स्वीकृत नक्शे के विपरीत बनाए गए अवैध निर्माणों के खिलाफ सीलिंग की ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई।
दो घंटे के महाभियान में सीलिंग की कार्रवाई
केडीए के प्रवर्तन दस्ते ने सोमवार को महज दो घंटे की भीतर ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 16 अवैध प्रतिष्ठानों को सील कर दिया। इसके साथ ही टीम ने 22 अन्य ऐसे भवनों को चिह्नित किया है, जहां नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। इन चिह्नित ठिकानों पर मंगलवार को बुलडोजर और सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।
केडीए सचिव अभय पांडेय ने स्पष्ट किया कि जो भी निर्माण स्वीकृत मानचित्र के विपरीत पाए जाएंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। विशेष रूप से जिन बेसमेंटों का उपयोग पार्किंग या स्टोर रूम के बजाय व्यावसायिक गतिविधियों (जैसे कोचिंग या लाइब्रेरी) के लिए हो रहा है, उन्हें तुरंत सील किया जा रहा है। प्रशासन का यह सख्त अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।
कोचिंगमंडी में छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़
लखनऊ अग्निकांड ने पूरे प्रदेश के कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। ‘दैनिक जागरण’ द्वारा कानपुर के प्रमुख कोचिंग हब ‘काकादेव कोचिंगमंडी’ में की गई जमीनी पड़ताल में बेहद चौंकाने वाले और डराने वाले तथ्य सामने आए हैं।
यहां के अधिकांश बड़े और छोटे संस्थान पूरी तरह बेसमेंट में संचालित हो रहे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि आग जैसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए इन संस्थानों में महज एक छोटा फायर एस्टिंग्यूशर (अग्निशमन यंत्र) लटका मिला। पूर्व में हुई छोटी-मोटी घटनाओं के बाद भी अग्निशमन विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया और केवल कागजी नोटिस देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
तंग रास्तों और बेसमेंट में चलती डिजिटल लाइब्रेरी
काकादेव की कोचिंगमंडी में इंजीनियरिंग, मेडिकल, सिविल सेवा और एसएससी जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले 100 से अधिक छोटे-बड़े कोचिंग संस्थान और आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी चल रही हैं। यहाँ कानपुर के अलावा आसपास के जिलों से आए हजारों छात्र अपने भविष्य को संवारने आते हैं।
किंतु, ये संस्थान उनके भविष्य के साथ-साथ उनकी जिंदगी से भी बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं। तंग गलियों और बेसमेंट में चल रहे इन सेंटरों में आने-जाने के लिए केवल एक ही संकरा रास्ता है। यदि कभी खुदा-न-खास्ता कोई अनहोनी या आगजनी हो जाए, तो बच्चों का वहां से सुरक्षित बाहर निकलना लगभग असंभव है।
दिल्ली अग्निकांड से भी नहीं लिया कोई सबक
कानपुर की यह बदइंतजामी तब है जब दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में विशेष अभियान चलाकर बेसमेंट खाली कराए गए थे। बाइलॉज और नियमों के मुताबिक, किसी भी भवन के बेसमेंट का उपयोग सिर्फ सामान रखने (स्टोरेज) या पार्किंग के लिए ही किया जा सकता है।
लेकिन समय बीतने के साथ ही भू-माफिया और संस्थान संचालक फिर से बेखौफ हो गए। आज शहर में नियमों को ताक पर रखकर बेसमेंट के भीतर धड़ल्ले से कोचिंग क्लासेज, अस्पताल, पैथोलॉजी लैब और रेस्टोरेंट संचालित किए जा रहे हैं, जो किसी बड़े हादसे को खुली दावत दे रहे हैं।

