Ram Mandir Donation: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे और सोने-कांस्य-चांदी के आभूषणों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. कथित दान चोरी के इस संवेदनशील मामले ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है. शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाते हुए एक बड़ा दावा किया है, जिससे इस पूरे प्रकरण पर सियासी घमासान और तेज हो गया है.
शिवसेना (UBT) का तीखा हमला
संजय राउत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए राम मंदिर निर्माण के लिए शिवसेना द्वारा दिए गए योगदान पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने लिखा कि उद्धव ठाकरे ने हजारों शिवसैनिकों और पूज्य संतों की गरिमामयी उपस्थिति में बेहद खुले मन से 1 करोड़ रुपये और 4 किलोग्राम वजन की एक पवित्र चांदी की ईंट दान स्वरूप सौंपी थी. राउत का आरोप है कि इस ऐतिहासिक दान के सालों बीत जाने के बाद भी ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक रसीद या अपडेट नहीं मिला है. उन्होंने सीधा सवाल दागा है कि आखिर वह चांदी की ईंट कहां गायब हो गई? अब इस पूरे मामले की गहन जांच और जवाबदेही तय करने का वक्त आ गया है.
कानूनी शिकंजा और पुलिसिया कार्रवाई
अयोध्या स्थित प्रभु श्री राम के मंदिर में चढ़ावे की चोरी से जुड़े इस बड़े स्कैंडल में कानूनी कार्रवाई भी तेज हो गई है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत के बाद गुरुवार को स्थानीय पुलिस ने आठ नामजद व्यक्तियों समेत कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है. यह पुलिसिया कार्रवाई ट्रस्ट के सम्मानित सदस्य कृष्णमोहन की तहरीर पर की गई है. दर्ज मुकदमे में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव और मनीष कुमार यादव को आरोपी बनाया गया है. फिलहाल सभी आरोपी पुलिस कस्टडी में हैं और उनसे कड़ी पूछताछ की जा रही है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त रुख
चढ़ावा और डोनेशन चोरी का यह संवेदनशील मामला सामने आते ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रदेश सरकार से एक विशेष और स्वतंत्र जांच की गुहार लगाई थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देश पर तत्काल प्रभाव से एक एसआईटी (SIT) यानी विशेष जांच दल का गठन किया गया था. इस विशेष टीम ने दो दिनों तक गहन छानबीन करने के बाद अपनी शुरुआती गोपनीय रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है, जिसमें दोषियों के खिलाफ बेहद कठोर दंडात्मक सिफारिशें की गई हैं.
दूध का दूध और पानी का पानी होगा
इस पूरे घटनाक्रम पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एक आधिकारिक बयान भी जारी किया गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस बेहद संवेदनशील और आस्था से जुड़े मामले में एसआईटी की जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, जिससे ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ होकर रहेगा. मुख्यमंत्री ने साफ चेतावनी दी है कि प्रभु राम के दरबार में इस तरह की हेराफेरी करने वाले किसी भी दोषी को कतई बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें कानून के तहत सख्त से सख्त सजा भुगतनी होगी.

