Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और आभूषणों की हेराफेरी के मामले पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोपियों की तुलना ‘रावण’ से करते हुए कहा कि त्रेतायुग के रावण ने माता जानकी का हरण किया था, लेकिन आज के इस कलयुगी रावण ने राम मंदिर के दान पात्र से लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा और भरोसे को चुराया है। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और सख्त जांच के बाद सभी दोषी पकड़े जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि राम मंदिर का धन हड़पने वालों को सरकारी कानून के साथ-साथ भगवान का महादंड भी भुगतना पड़ेगा, जिससे उनका सपरिवार सर्वनाश निश्चित है।
न्यायिक प्रक्रिया और पुलिसिया कार्रवाई
राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे के कथित गबन के मामले में कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों को कोर्ट ने आगामी 29 जून तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। जांच टीम (एसआईटी) ने तत्परता दिखाते हुए अब तक आरोपियों के कब्जे से 79.85 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि बरामद कर ली है। इसी बीच, सोशल मीडिया और राजनीतिक हल्कों में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे की अटकलें तेज हो गईं, जिस पर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि उनके पास इस तरह की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है।
सियासी घमासान और विपक्षी दलों का वार
इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि जनआस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे ‘धर्मयुद्ध’ करार देते हुए कथित ‘चंदा चोरों’ के सामाजिक बहिष्कार की अपील की है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि भाजपा का ‘लंकाकांड’ अब अयोध्या से ही शुरू हो गया है। वहीं, कांग्रेस ने पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने और मौजूदा राम मंदिर ट्रस्ट को तुरंत भंग करने की पुरजोर मांग की है।
सत्तापक्ष का पलटवार और एसआईटी जांच
विपक्ष के चौतरफा हमलों के बीच उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सरकार का बचाव किया है। उन्होंने विपक्ष के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह पूरा विवाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की मिलीभगत और एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। गौरतलब है कि यह एफआईआर राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत के बाद दर्ज की गई है। 7 जून को दान में विसंगतियों के आरोप सामने आने के बाद सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट और सिफारिशों के आधार पर ही यह कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

