Sonam Wangchuk Hunger Strike: लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर देश में सियासी पारा चढ़ गया है। वर्तमान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर वांगचुक का आंदोलन आज गुरुवार को 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है। लगातार भूख हड़ताल के कारण उनका स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ रहा है। इस संवेदनशील स्थिति पर उत्तर प्रदेश में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रदेश प्रवक्ता शादाब चौहान ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एक न्यूज चैलल से विशेष बातचीत में उन्होंने सरकार की कार्यशैली और प्रशासनिक रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए।
केंद्र की वर्तमान नीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर AIMIM का कड़ा प्रहार
शादाब चौहान ने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए उसे अत्यंत अहंकारी करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार बिना किसी जमीनी शोध और व्यापक विचार-विमर्श के कानून देश पर थोप देती है। जब ये नीतियां विफल हो जाती हैं, तो अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए सत्ता के अहंकार का सहारा लिया जाता है।
“यह कोई पहला मौका नहीं है जब सरकार ने जनभावनाओं की अनदेखी की हो। जब नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लाया गया, तब भी देश की जनता सड़कों पर उतरी। जब कृषि कानून थोपे गए, तब भी किसानों को महीनों तक आंदोलन करना पड़ा।” – शादाब चौहान, प्रवक्ता, AIMIM
उन्होंने याद दिलाया कि चिकित्सा प्रवेश परीक्षा (NEET) के पेपर लीक का मुद्दा भी सबसे पहले एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ही पुरजोर तरीके से उठाया था, जिसके बाद अन्य विपक्षी दलों ने इस पर बोलना शुरू किया।
शिक्षा मंत्रालय के नेतृत्व और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर उठे सवाल
ओवैसी की पार्टी के प्रवक्ता ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं को कटघरे में खड़ा किया। चौहान ने सवाल उठाया कि जब देश के प्रधानमंत्री के पास वैश्विक दौरों के लिए पर्याप्त समय है, तो फिर देश के भीतर शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए जीवन समर्पित करने वाले एक बुजुर्ग सुधारक से मिलने का वक्त क्यों नहीं है?
उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान को ‘आजाद भारत का सबसे नाकाम शिक्षा मंत्री’ बताते हुए पूछा कि आखिर प्रधानमंत्री उन्हें पद से हटाने में संकोच क्यों कर रहे हैं? वांगचुक जैसे प्रतिष्ठित व्यक्ति, जो शिक्षा नीति को लेकर ठोस तथ्य और तर्क सरकार के सामने रखना चाहते हैं, उन्हें अनसुना करना सरकार की हठधर्मिता को दर्शाता है।
विपक्ष की एकजुटता और आंदोलन के प्रति सरकार की जवाबदेही का विश्लेषण
चौहान ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह सवाल महत्वपूर्ण नहीं है कि विपक्ष का कौन सा दल सोनम वांगचुक का समर्थन कर रहा है या किसके पास कितना सहयोग है। असल मुद्दा यह है कि एक जिम्मेदार नागरिक और शिक्षाविद अगर देश की भलाई के लिए संवाद स्थापित करना चाहता है, तो लोकतांत्रिक सरकार को आगे बढ़कर बात करनी चाहिए।
उन्होंने अंत में जोर देकर कहा कि भारत को ऐसे मंत्रियों की कोई आवश्यकता नहीं है जो अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। वांगचुक की बिगड़ती सेहत ने अब इस पूरे घटनाक्रम को एक गंभीर मोड़ दे दिया है, जहां सरकार की चुप्पी पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

