Vande Mataram Bill: संसद के मानसून सत्र के नौवें दिन लोकसभा ने वंदे मातरम् बिल को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले 29 जुलाई को राज्यसभा भी इस विधेयक को मंजूरी दे चुकी थी। अब संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद इस बिल के कानून बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। अगला चरण राष्ट्रपति की मंजूरी का है, जिसके बाद यह विधेयक आधिकारिक रूप से कानून का रूप ले लेगा।
वंदे मातरम् कानून लागू होने से पहले राष्ट्रपति की मंजूरी
संसद से पारित होने के बाद विधेयक को राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद इसे भारत के राजपत्र (गजट ऑफ इंडिया) में प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तिथि से यह कानून पूरे देश या अधिसूचित क्षेत्रों में प्रभावी हो जाएगा। यह प्रक्रिया किसी भी केंद्रीय विधेयक को कानून का दर्जा देने की संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा होती है।
विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में वंदे मातरम् बिल को मिली मंजूरी
लोकसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से शोर-शराबा और विरोध देखने को मिला। इसके बावजूद सदन में मतदान कराया गया और वंदे मातरम् बिल पारित हो गया। विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन में विचार और पारित करने के लिए प्रस्तुत किया था।
राष्ट्रीय सम्मान संशोधन विधेयक पर सरकार का पक्ष, पर बताया मुद्दा
वंदे मातरम् बिल को मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार की ओर से संसद में पेश किया गया था। इस पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान किसी राजनीतिक दल या विचारधारा का विषय नहीं, बल्कि पूरे देश की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ नहीं है, बल्कि राष्ट्र की गरिमा और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया है।
वंदे मातरम् को मिलेगा राष्ट्रीय गान जैसा कानूनी संरक्षण
नए कानून के लागू होने के बाद वंदे मातरम् गीत को भी वही कानूनी सुरक्षा मिलेगी, जो वर्तमान में राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ को प्राप्त है। अब तक राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 के तहत इन राष्ट्रीय प्रतीकों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई थी। संशोधन के बाद वंदे मातरम् को भी इस सूची में शामिल कर लिया जाएगा।
वंदे मातरम् के अपमान को माना जाएगा अपराध, तीन साल तक की सजा का प्रावधान
विधेयक के कानून बनने के बाद वंदे मातरम् गीत का अपमान करना दंडनीय अपराध माना जाएगा। इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति वंदे मातरम् के गायन में बाधा डालता है या किसी को इसे गाने से रोकता है, तो वह भी अपराध की श्रेणी में आएगा। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। यही दंड वर्तमान में राष्ट्रीय गान के अपमान से जुड़े मामलों में भी लागू है।
राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर कानूनी दायरा होगा और मजबूत
वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण मिलने के साथ राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून का दायरा और व्यापक हो जाएगा। सरकार का मानना है कि इस संशोधन से राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूती मिलेगी। वहीं, विधेयक को लेकर संसद में राजनीतिक बहस भी देखने को मिली। अब सभी की निगाहें राष्ट्रपति की मंजूरी पर हैं, जिसके बाद यह नया कानून औपचारिक रूप से लागू हो जाएगा।

