You are currently viewing Anti Paper Leak Bill: राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर खरगे का सरकार पर हमला, बोले- ‘बिल में आंकड़े हैं, समाधान नहीं’

Anti Paper Leak Bill: राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर खरगे का सरकार पर हमला, बोले- ‘बिल में आंकड़े हैं, समाधान नहीं’

Anti Paper Leak Bill: राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्षों से पेपर लीक की घटनाओं में दोषी बचते रहे, जबकि मेहनत करने वाले छात्र सबसे अधिक प्रभावित हुए। खरगे ने आरोप लगाया कि नए विधेयक में ऐसे ठोस प्रावधान नहीं हैं, जो भविष्य में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोक सकें।

पेपर लीक कानून पर सवाल

खरगे ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में परीक्षा प्रणाली को मजबूत करना चाहती थी तो आवश्यक कदम पहले ही उठा सकती थी। उन्होंने सवाल किया कि जिन सुधारों की बात अब की जा रही है, वे वर्ष 2024 में क्यों नहीं किए गए। उनके अनुसार, उस समय सरकार ने जल्दबाजी में कानून बनाया, लेकिन विपक्ष की आपत्तियों और सुझावों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार किए बिना पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा।

मल्लिकार्जुन खरगे का दावा

राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान खरगे ने कहा कि यह विधेयक अधूरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिल में पेपर लीक रोकने की स्पष्ट रणनीति या प्रभावी कार्ययोजना का अभाव है। उनके अनुसार, इसमें केवल आंकड़ों और दंडात्मक प्रावधानों का उल्लेख है, लेकिन परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक संस्थागत सुधारों का स्पष्ट रोडमैप नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष लगातार छात्रों के मुद्दे को संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठाता रहा है।

राहुल गांधी के मुद्दा उठाने का जिक्र

खरगे ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लंबे समय से पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं का मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि छात्रों के लगातार आंदोलन और बढ़ते जनदबाव के कारण सरकार को इस विषय पर कदम उठाने पड़े। उनके अनुसार, छात्रों के संघर्ष ने सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने संसद के भीतर और बाहर छात्रों की आवाज को प्रमुखता से उठाया।

सरकार पर छात्रों की अनदेखी का आरोप

विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि जब छात्र विभिन्न राज्यों में लंबे समय तक प्रदर्शन कर रहे थे, तब सरकार ने उनकी मांगों पर समय रहते संवाद नहीं किया। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं को सुनने के बजाय उनके आंदोलनों पर सख्ती बरती गई। खरगे ने यह भी सवाल उठाया कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति किस स्तर पर दी गई। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की जवाबदेही तय करने की मांग की।

शिक्षा नीति और परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत पर दिया जोर

खरगे ने कहा कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनके अनुसार, यदि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी सुरक्षा के व्यापक सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में भी पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती रहेंगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि छात्रों का विश्वास बहाल करने के लिए परीक्षा संचालन की पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जाए और सभी संबंधित संस्थाओं को अधिक जवाबदेह बनाया जाए।

सदन में सरकार से जवाबदेही की मांग, विपक्ष ने उठाए कई सवाल

अपने संबोधन के अंत में मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सरकार को इस पूरे मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि इस विषय पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए सरकार को सभी पक्षों के सुझावों को शामिल करते हुए प्रभावी और व्यावहारिक कदम उठाने चाहिए, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनी रहे।

Spread the love

Leave a Reply