Reservation Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने प्रदर्शनकारियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रदर्शन तथाकथित उच्च जातियों के सामाजिक वर्चस्व और जातिगत विशेषाधिकार को बनाए रखने की कोशिश को सामने लाता है।
प्रकाश आंबेडकर ने आरक्षण विरोधी प्रदर्शन को SC, ST और OBC सामाजिक न्याय के खिलाफ बताया
प्रकाश आंबेडकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दिल्ली में हुए आरक्षण विरोधी प्रदर्शन को अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के सामाजिक न्याय के खिलाफ बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल लोगों ने जाति व्यवस्था की रक्षा के लिए अपनी तथाकथित सवर्ण पहचान को प्रमुखता से सामने रखा। आंबेडकर के मुताबिक, इस तरह की राजनीति सामाजिक बराबरी और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चुनौती पैदा करती है।
बाबा साहेब आंबेडकर के 25 नवंबर 1949 के भाषण का किया जिक्र
अपने बयान में प्रकाश आंबेडकर ने संविधान सभा में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के 25 नवंबर 1949 के समापन भाषण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने जाति व्यवस्था को सामाजिक एकता के लिए गंभीर बाधा माना था।
प्रकाश आंबेडकर के अनुसार, जातियां समाज को अलग-अलग हिस्सों में बांटती हैं और लोगों के बीच सामाजिक दूरी पैदा करती हैं। उनका कहना है कि वास्तविक बंधुत्व के बिना समानता और स्वतंत्रता को मजबूत आधार नहीं मिल सकता।
जाति व्यवस्था और सवर्ण वर्चस्व पर प्रकाश आंबेडकर का तीखा हमला
प्रकाश आंबेडकर ने अपने पोस्ट में आरक्षण विरोधी प्रदर्शन को लेकर कहा कि खुले तौर पर सवर्ण पहचान और राजनीतिक नारों के साथ प्रदर्शन करना उसी सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देता है, जिसके खिलाफ बाबा साहेब ने चेताया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि जातिगत वर्चस्व की रक्षा के लिए सवर्ण पहचान को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। आंबेडकर के मुताबिक, इससे समाज में समानता और भाईचारे की भावना कमजोर होती है तथा सामाजिक न्याय की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
‘बंधुत्व के बिना समानता और स्वतंत्रता केवल दिखावा’
प्रकाश आंबेडकर ने बाबा साहेब के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल राजनीतिक या संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए सामाजिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी एकता जरूरी है। उनके मुताबिक, बंधुत्व इस प्रक्रिया का अहम आधार है।
उन्होंने कहा कि समानता और स्वतंत्रता तभी टिकाऊ हो सकती हैं, जब समाज में बंधुत्व की भावना मजबूत हो। यदि सामाजिक न्याय की नीतियों का विरोध जातिगत विशेषाधिकारों को बचाने के लिए किया जाता है, तो इससे लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
SC, ST और OBC आरक्षण के विरोध पर आंबेडकर ने उठाया सामाजिक न्याय का मुद्दा
प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में वंचित और शोषित समुदायों की उन्नति को किसी दूसरे वर्ग के वर्चस्व के खिलाफ हमला नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने सामाजिक न्याय की नीतियों को संविधान के समानता आधारित दृष्टिकोण से जोड़ते हुए कहा कि इन नीतियों का उद्देश्य ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करना है।
उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक बंधुत्व समाज की वास्तविकता नहीं बनता, तब तक समानता और स्वतंत्रता केवल सतही उपलब्धियां बनकर रह जाएंगी। उनके अनुसार, सामाजिक न्याय की पहली बड़ी चुनौती के सामने ऐसी व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है।
कांग्रेस की चुप्पी पर प्रकाश आंबेडकर का सवाल, BJP-RSS पर भी लगाया आरोप
अपने पोस्ट के अंत में प्रकाश आंबेडकर ने आरक्षण विरोधी प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रदर्शन को आरएसएस और बीजेपी की ओर से राजनीतिक रूप से संगठित किया गया था। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में अपने पोस्ट में कोई विस्तृत प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
आरक्षण विरोधी प्रदर्शन पर कांग्रेस की चुप्पी को बताया निंदनीय
प्रकाश आंबेडकर ने कांग्रेस नेतृत्व की कथित चुप्पी को भी गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि जब सामाजिक न्याय के खिलाफ सवर्ण पहचान और वर्चस्व का खुले तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, तब राजनीतिक दलों की चुप्पी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आरक्षण को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर सामाजिक न्याय, जातिगत प्रतिनिधित्व और आरक्षण व्यवस्था को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अब निगाह इस बात पर है कि बीजेपी, आरएसएस और कांग्रेस की ओर से प्रकाश आंबेडकर के आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

