UP Election: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने युवाओं, खासकर Gen-Z, को पार्टी संगठन और चुनावी राजनीति में बड़ी भूमिका देने का ऐलान किया है। मायावती ने कहा कि बसपा लंबे समय से युवाओं को संगठन में करीब 50 प्रतिशत तक भागीदारी देने की नीति पर काम कर रही है। अब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भी युवा प्रतिभाओं को उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
मायावती का Gen-Z को साधने का दांव, संगठन में 50 प्रतिशत भागीदारी
मायावती ने शनिवार को अपने एक्स अकाउंट पर कहा कि बसपा पूरे देश और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में युवाओं को संगठन में आगे बढ़ाने की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि Gen-Z और नई पीढ़ी को पार्टी संगठन में लगभग 50 प्रतिशत भागीदारी देने की प्रक्रिया लंबे समय से अपनाई जा रही है। पार्टी का उद्देश्य युवाओं को नेतृत्व की जिम्मेदारी देकर अंबेडकरवादी विचारधारा और संवैधानिक मूल्यों को आगे बढ़ाना है।
विधानसभा चुनाव में युवा उम्मीदवारों को टिकट में प्राथमिकता
बसपा प्रमुख ने कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों में सर्वसमाज के कर्मठ, योग्य और युवा लोगों को पार्टी उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही उम्मीदवार चयन में महिलाओं और अन्य योग्य प्रतिभाओं को भी उचित प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया गया है।
अंबेडकरवादी राजनीति और संवैधानिक मूल्यों पर जोर
मायावती ने कहा कि नई पीढ़ी के माध्यम से देश में अपेक्षित अंबेडकरवादी राजनीति, सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों का तेजी से विकास किया जा सकता है। उनका कहना है कि भारतीय संविधान के मानवतावादी, समतामूलक और धर्मनिरपेक्ष उद्देश्यों को केवल कागजों तक सीमित न रखकर जमीन पर लागू करना जरूरी है।
Gen-Z और Gen-Alpha की बुनियादी जरूरतों का मुद्दा
मायावती ने अपनी सरकारों का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा की चार बार की सरकारों में कानून-व्यवस्था के साथ जनहित, जनकल्याण और विकास को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी नौकरी और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुख बताते हुए कहा कि शहरी और ग्रामीण विकास के साथ Gen-Z और Gen-Alpha की बुनियादी जरूरतों पर भी मजबूत इच्छाशक्ति के साथ काम किया गया।
मायावती का दावा- प्रदेश में कमजोर हुआ कानून का राज
बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि विरोधी दलों के जातिवादी रवैये के कारण उनकी पार्टी 2012 में उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार सरकार नहीं बना सकी। उन्होंने दावा किया कि आज भी सर्वसमाज के लोगों को इसका अफसोस है। मायावती के मुताबिक, बसपा सरकार के बाद प्रदेश में कानून का राज कमजोर हुआ, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उम्मीदवार चयन में युवा और महिलाओं को प्राथमिकता
मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि चुनावी उम्मीदवारों के चयन में सर्वसमाज के योग्य लोगों, युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता दी जाए। उनके इस निर्देश को आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर संगठन में नई पीढ़ी को अधिक प्रतिनिधित्व देने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
परिवारवाद से दूरी का मायावती ने किया जिक्र
मायावती ने कहा कि बसपा बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के आत्मसम्मान और स्वाभिमान के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस मिशन की सफलता में किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अपने परिवार को लेकर कहा कि उन्होंने कांशीराम की तरह अपने भाई-बहन, परिवार के युवाओं और करीबी रिश्तेदारों को पार्टी के काम तक सीमित रखा और उन्हें सांसद, विधायक, मंत्री या अन्य राजनीतिक पदों का लाभ नहीं दिया।
युवाओं पर फोकस से बसपा की नई राजनीतिक रणनीति
मायावती का Gen-Z, युवा उम्मीदवारों और महिलाओं को संगठन व चुनावी राजनीति में प्राथमिकता देने का फैसला बसपा की नई रणनीति का संकेत माना जा रहा है। पार्टी की कोशिश अंबेडकरवादी विचारधारा और संवैधानिक मूल्यों के साथ नई पीढ़ी को जोड़ने की है। आने वाले विधानसभा चुनावों में यह रणनीति बसपा के उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक ढांचे में किस तरह दिखाई देती है, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।

