लखनऊ, 16 सितंबर। उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक और स्थानीय परिवहन व्यवस्था को विस्तार देने की तैयारी है। लखनऊ और कानपुर में सक्रिय ‘भारत टैक्सी’ मॉडल को अब प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सहकारी टैक्सी मॉडल को प्रदेशव्यापी स्वरूप देने की तैयारी चल रही है।
इस मॉडल के तहत यात्रियों को बाइक, ऑटो और कैब—तीनों तरह की परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। सरकार का फोकस केवल बड़े शहरों तक सीमित रहने के बजाय छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवा पहुंचाने पर है।
भारत टैक्सी में यात्रियों को मिलेगा जीरो कमीशन और नो-सर्ज प्राइसिंग का विकल्प
प्रस्तावित भारत टैक्सी मॉडल की प्रमुख विशेषताओं में जीरो कमीशन और नो-सर्ज प्राइसिंग शामिल हैं। मांग बढ़ने के दौरान किराये में अचानक होने वाली बढ़ोतरी से यात्रियों को राहत देने के लिए नो-सर्ज प्राइसिंग व्यवस्था का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा।
पीक टाइम या अधिक मांग वाले समय में किराये में सर्ज प्राइसिंग नहीं होने से यात्रियों को यात्रा की लागत का बेहतर अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है। इससे रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, एयरपोर्ट, अस्पताल, बाजार और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों तक पहुंचने के लिए लोगों के पास परिवहन का एक अतिरिक्त विकल्प होगा।
जीरो कमीशन मॉडल से ड्राइवरों को कारोबार में हिस्सेदारी
भारत टैक्सी की योजना में यात्रियों के साथ-साथ टैक्सी चालकों यानी ‘सारथियों’ को भी महत्वपूर्ण भूमिका देने की अवधारणा है। जीरो कमीशन मॉडल के तहत चालक की कमाई से प्रत्येक यात्रा पर प्लेटफॉर्म कमीशन काटने के बजाय सहकारी व्यवस्था के माध्यम से उन्हें कारोबार से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
इस मॉडल में चालक सिर्फ सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि कारोबार में हिस्सेदार बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। इसका उद्देश्य चालक नेटवर्क को अधिक संगठित और टिकाऊ बनाना भी है।
75 जिलों तक पहुंचेगी टैक्सी सेवा, छोटे शहरों को भी मिलेगा विकल्प
भारत टैक्सी मॉडल को प्रदेश के सभी 75 जिलों में विस्तार देने की तैयारी का मतलब है कि टैक्सी सेवा को राजधानी और बड़े शहरों से आगे जिलास्तर तक पहुंचाया जाएगा। छोटे शहरों में रहने वाले लोगों को भी संगठित टैक्सी सेवा का अतिरिक्त विकल्प मिलने की उम्मीद है।
जिले के भीतर या एक जिले से दूसरे जिले तक यात्रा, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, अस्पताल और बाजार जाने वाले लोगों के लिए स्थानीय परिवहन की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
PACS के जरिए गांवों तक पहुंचेगी ‘भारत टैक्सी’
भारत टैक्सी का विस्तार सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के नेटवर्क के जरिये इस मॉडल को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने की योजना है। इससे गांवों में रहने वाले लोगों को जिला मुख्यालय, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और बाजार तक आने-जाने के लिए स्थानीय टैक्सी सेवा का विकल्प मिल सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन के साथ रोजगार के अवसर
गांवों तक टैक्सी सेवा पहुंचने से स्थानीय स्तर पर वाहन संचालन और परिवहन से जुड़े स्वरोजगार के अवसर भी विकसित होने की संभावना है। सहकारी संस्थाओं के नेटवर्क से परिवहन सेवा को जोड़कर इस मॉडल की पहुंच बढ़ाने की तैयारी है।
भारत टैक्सी मॉडल में यात्रियों और सारथियों दोनों पर फोकस
प्रस्तावित व्यवस्था में यात्रियों के लिए परिवहन का नया विकल्प उपलब्ध कराने के साथ ड्राइवरों को भी कारोबार में हिस्सेदारी देने की अवधारणा है। एक तरफ जीरो कमीशन और नो-सर्ज प्राइसिंग जैसी सुविधाओं पर जोर है, वहीं दूसरी तरफ सहकारी मॉडल के जरिए सारथियों को जोड़ने की योजना है।
योगी सरकार के इस प्रस्तावित विस्तार के बाद राजधानी लखनऊ से लेकर छोटे जिलों और ग्रामीण इलाकों तक बाइक, ऑटो और कैब सेवा का दायरा बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे प्रदेश में स्थानीय परिवहन के विकल्पों को व्यापक बनाने की कोशिश की जाएगी।

