Rajya Sabha Election: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव के लिए अपने आठ अधिकृत उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। पार्टी की सूची में अनुभवी नेताओं, संगठन से जुड़े चेहरों और नए नामों का संतुलन नजर आ रहा है। भाजपा ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पाण्डेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है।
BJP की राज्यसभा उम्मीदवार सूची में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन
भाजपा की ओर से जारी उम्मीदवारों की सूची में अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को साधने की कोशिश दिखाई दे रही है। सूची में दो ब्राह्मण चेहरों को भी जगह दी गई है। पार्टी का यह फैसला आगामी राजनीतिक समीकरणों और सामाजिक संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वहीं, इस बार केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और बीएल वर्मा को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार नहीं बनाया गया है। भाजपा की नई सूची में संगठन और जमीनी राजनीति से जुड़े कई नेताओं को अवसर दिया गया है।
धर्मपाल सिंह और राधाकांत ओझा को राज्यसभा का टिकट
धर्मपाल सिंह उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में पशुधन मंत्री हैं। वह भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और बरेली की आंवला विधानसभा सीट से विधायक हैं। धर्मपाल सिंह योगी सरकार में दो बार मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनके लंबे राजनीतिक अनुभव को देखते हुए भाजपा ने उन्हें राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है।
राधाकांत ओझा प्रयागराज के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। वह दो बार बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए हैं। कानूनी और सामाजिक क्षेत्र में उनकी पहचान एक प्रतिष्ठित चेहरे के तौर पर है। भाजपा ने उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर पेशेवर और सामाजिक क्षेत्र को भी प्रतिनिधित्व देने का संकेत दिया है।
प्रकाश पाल और विद्यासागर सोनकर पर भाजपा ने जताया भरोसा
प्रकाश पाल वर्तमान में उत्तर प्रदेश भाजपा के ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। वह कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। संगठन में लंबे अनुभव और ओबीसी समुदाय के बीच सक्रिय भूमिका को देखते हुए उनका नाम राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में शामिल किया गया है।
विद्यासागर सोनकर भाजपा के प्रमुख दलित चेहरों में गिने जाते हैं। जौनपुर से ताल्लुक रखने वाले सोनकर पूर्व लोकसभा सांसद और पूर्व विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं। वह पार्टी के प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। राजनीतिक और संगठनात्मक अनुभव के चलते उनका चयन भाजपा की सामाजिक प्रतिनिधित्व की रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
गोपी कृष्ण पाण्डेय और प्रियंका सिंह रावत को भी मौका
गोपी कृष्ण पाण्डेय भाजपा के वरिष्ठ संगठनकर्ता और पार्टी पदाधिकारी हैं। वह लंबे समय से संगठन के जमीनी कार्यों और विभिन्न राजनीतिक अभियानों में सक्रिय रहे हैं। पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में उनके अनुभव को देखते हुए भाजपा ने उन्हें राज्यसभा चुनाव में उतारा है।
वहीं, प्रियंका सिंह रावत भाजपा की प्रमुख महिला नेताओं में शामिल हैं। वह बाराबंकी लोकसभा क्षेत्र से 16वीं लोकसभा की सांसद रह चुकी हैं। इसके अलावा वह प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रही हैं। उनके जरिए भाजपा ने राज्यसभा में महिला प्रतिनिधित्व को भी मजबूत करने का प्रयास किया है।
राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार भी उम्मीदवार
राम प्रताप सिंह चौहान उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश महामंत्री हैं और संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वह आगरा की एत्मादपुर विधानसभा सीट से वर्ष 2017 से 2022 तक भाजपा विधायक रहे हैं। वर्तमान में वह पार्टी के पश्चिम क्षेत्र के प्रभारी के तौर पर भी काम कर रहे हैं। उनका संगठनात्मक अनुभव राज्यसभा उम्मीदवारी में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
श्रुति गंगवार बरेली क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। वह अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक की चेयरपर्सन हैं और IIT से शिक्षा प्राप्त कर चुकी हैं। वह वरिष्ठ भाजपा नेता और राज्यपाल संतोष गंगवार की पुत्री हैं। बरेली-बहेड़ी क्षेत्र में उनकी सक्रियता को देखते हुए भाजपा ने उन्हें भी राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में शामिल किया है।
राज्यसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति पर टिकी नजर
उत्तर प्रदेश से भाजपा द्वारा घोषित आठ उम्मीदवारों की सूची में सरकार, संगठन, सामाजिक प्रतिनिधित्व, महिला नेतृत्व और पेशेवर क्षेत्र से जुड़े चेहरों का मिश्रण देखने को मिलता है। धर्मपाल सिंह और विद्यासागर सोनकर जैसे अनुभवी नेताओं से लेकर श्रुति गंगवार जैसे अपेक्षाकृत नए चेहरे तक, पार्टी ने अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों को साधने की कोशिश की है। अब इन उम्मीदवारों के चयन के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।

