अयोध्या/रतलाम: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और चंदे में कथित गबन का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर समूचा विपक्ष सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर हमलावर है। इसी कड़ी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शुक्रवार को इस मामले में 8 आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के तीखे सवाल
मध्य प्रदेश के रतलाम में मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इस कथित घोटाले को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए कहा, “मैंने राम मंदिर के लिए अपने पास से 1,11,000 रुपये का दान दिया था और यह भुगतान मैंने चेक के माध्यम से किया था। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इस ट्रस्ट के प्रतिनिधियों को नियुक्त किया था, लेकिन इतनी बड़ी गड़बड़ी के बाद भी वे आज तक पूरी तरह चुप हैं।”
दिग्विजय सिंह ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि बड़े पैमाने पर लूट हुई है, फिर भी शुरुआत में एफआईआर (FIR) दर्ज क्यों नहीं की गई? अब जाकर हाल ही में एफआईआर दर्ज हुई है, जबकि पुलिस को तुरंत आरोपियों की रिमांड मांगनी चाहिए थी।
327 करोड़ रुपये की भारी-भरकम आमदनी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2024 में अयोध्या में राम मंदिर का भव्य उद्घाटन किया था। इसके बाद से ही देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और मंदिर में मिलने वाले चढ़ावे में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी गई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक, राम मंदिर ट्रस्ट को कुल 327 करोड़ रुपये की भारी-भरकम आमदनी हुई है। इस कुल कमाई में से केवल 153 करोड़ रुपये नकद और अन्य रूपों में सीधे चढ़ावे के तौर पर मंदिर को प्राप्त हुए थे।
हिडन कैमरों से खुला राज
भले ही चंदा चोरी और गबन का यह विवाद अब सार्वजनिक रूप से गहराया है, लेकिन मंदिर ट्रस्ट को इसकी भनक काफी पहले ही लग गई थी। मई के अंतिम सप्ताह में जब ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बैंक खातों में जमा हो रही दैनिक और साप्ताहिक राशि का मिलान किया, तो वे हैरान रह गए। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद दानपेटियों में आने वाला चढ़ावा औसत से काफी कम था।
इस गंभीर संदेह के बाद ट्रस्ट ने बेहद गोपनीय ढंग से जाल बिछाया। जिस विशेष कमरे में दानपेटियां खोलकर नोटों की गिनती की जाती थी और गड्डियां बनाई जाती थीं, वहां प्रशासन की मदद से चुपके से हिडन (गुप्त) कैमरे लगा दिए गए। इन्हीं कैमरों की फुटेज के आधार पर इस कथित चोरी की परतें खुलीं, जिसके बाद शुक्रवार, 26 जून को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में 8 आरोपियों को धर दबोचा। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है।

