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BHU Exam Controversy: BHU परीक्षा में ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ पर पूछे गए सवाल से यूपी में घमासान, ब्राह्मण महासभा ने जताया कड़ा विरोध

BHU Exam Controversy: उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों से जुड़े मुद्दों को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ताजा मामला देश के प्रतिष्ठित बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से सामने आया है। यहाँ संपन्न हुई परीक्षा में ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ (Brahmanical Patriarchy) को लेकर एक ऐसा सवाल पूछा गया, जिसने नया बवंडर खड़ा कर दिया है।

दरअसल, बीते दिनों बीएचयू में एमए इतिहास (MA History) के चौथे सेमेस्टर की परीक्षा आयोजित की गई थी। इस परीक्षा के प्रश्नपत्र में छात्रों से पूछा गया: ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता से आप क्या समझते हैं? ब्राह्मणवादी पितृसत्ता ने प्राचीन इतिहास में महिलाओं की प्रगति में किस तरह से बाधा डाली?’ इस सवाल का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर आते ही वायरल हो गया और इसे लेकर प्रदेश भर में तीखी बहस छिड़ गई है।

सनातन धर्म और सामाजिक व्यवस्था

इस परीक्षा प्रश्न को लेकर ब्राह्मण समाज और विभिन्न संगठनों में भारी आक्रोश है। अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की है। संगठन के अध्यक्ष राजेंद्र त्रिपाठी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस कृत्य की निंदा की और सनातन परंपरा का पक्ष रखा।

राजेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि पुरातन सनातनी पितृसत्तात्मक व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले लोग समाज में पूर्वाग्रह फैला रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि प्राचीन काल की व्यवस्था तत्कालीन परिस्थितियों के अनुरूप थी, जहाँ नारियों को पूजनीय माना जाता था। विवाह के बाद बेटियाँ दूसरे घर जाकर वहाँ के साम्राज्य की साम्राज्ञी बनती थीं। उन्होंने कहा कि सनातन व्यवस्था ने कभी भी महिलाओं के विकास में बाधा नहीं डाली, बल्कि उनके अधिकारों को सुरक्षित रखा है।

कामकाजी महिलाएं और संस्कारिक ढांचा

ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष ने आधुनिक व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि व्यावहारिक रूप से बेटियाँ विवाह के बाद दूसरे घर जाती हैं, जहाँ उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। पारंपरिक रूप से पुरुष बाहरी व्यवस्था और महिलाएं घर की आंतरिक व्यवस्था संभालती थीं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान में नारियों के बाहर कमाने जाने से आंतरिक संस्कारिक व्यवस्था पर असर पड़ा है और माता के पूर्ण समय न दे पाने से संततियाँ प्रभावित हो रही हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम परिस्थितियों के अनुसार बदलते हैं, लेकिन पूरी व्यवस्था को ‘ब्राह्मणवादी’ कहकर नारी उत्थान में बाधक बताना पूरी तरह गलत है। आज जब महिलाओं को संपत्ति और नौकरी में अधिकार मिल रहे हैं, तो किसी भी ब्राह्मणवादी व्यवस्था ने इसका विरोध नहीं किया है।

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों पर विवादित टिप्पणियां

यूपी में परीक्षाओं के दौरान ब्राह्मण समाज को निशाना बनाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले यूपी पुलिस दरोगा भर्ती (UP SI Exam) की लिखित परीक्षा में भी ब्राह्मणों को ‘अवसरवादी’ बताने वाला एक विवादित प्रश्न पूछा गया था। उस समय राज्य के उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) ने इसे अत्यंत आपत्तिजनक बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया था, जिसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPBPB) को इस पर खेद जताना पड़ा था।

इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में ‘घूसखोर पंडत’ नाम की एक फिल्म का भी व्यापक स्तर पर विरोध हुआ था और इस मामले में एफआईआर (FIR) तक दर्ज की गई थी। बाद में फिल्म के अभिनेता और निर्देशक ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए फिल्म का शीर्षक वापस ले लिया था। बीएचयू का यह नया विवाद इसी सिलसिले की अगली कड़ी माना जा रहा है।

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