UP News: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने युवाओं में बढ़ती मोबाइल फोन और सोशल मीडिया की लत को लेकर चिंता जताई है। कानपुर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आज कई युवा देर रात तक सोशल मीडिया पर रील्स देखते हुए जागते रहते हैं। उन्होंने युवाओं को सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने और अपने समय का उपयोग ज्ञान तथा भविष्य निर्माण में करने की सलाह दी।
‘गीता का पन्ना खत्म हो जाएगा, रीलों का नहीं’
कार्यक्रम के दौरान ब्रजेश पाठक ने सोशल मीडिया की आदत को समझाने के लिए रामायण और श्रीमद्भगवद्गीता का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि रामायण या गीता का कोई पन्ना पढ़ते-पढ़ते रात में पूरा किया जा सकता है, लेकिन सोशल मीडिया की रीलों का सिलसिला कभी खत्म नहीं होता। उनके मुताबिक लगातार रील्स देखने की आदत युवाओं के समय और ऊर्जा को प्रभावित कर रही है।
मोबाइल की लत और मानसिक तनाव से बचने की सलाह
डिप्टी सीएम ने युवाओं के बीच ब्रेकअप, तनाव और अन्य मानसिक परेशानियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई युवा रिश्तों से जुड़ी परेशानियों के कारण रातभर रोते या तनाव में रहते हैं। युवाओं को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि रिश्ते और जोड़ियां ईश्वर के हाथ में हैं, इसलिए इन चीजों को लेकर अत्यधिक चिंता करने के बजाय शिक्षा, ज्ञान और करियर पर ध्यान देना चाहिए।
युवाओं को सोशल मीडिया छोड़ ज्ञान और भविष्य पर ध्यान देने की नसीहत
ब्रजेश पाठक ने युवाओं से अपील की कि वे अपना बहुमूल्य समय सोशल मीडिया पर लगातार बिताने के बजाय ज्ञान अर्जित करने में लगाएं। उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ वास्तविक ज्ञान और सकारात्मक सोच भी जरूरी है। उनका संदेश था कि युवाओं को डिजिटल दुनिया में समय गंवाने के बजाय अपने लक्ष्य और भविष्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।
बच्चों पर पढ़ाई और नंबरों का बोझ कम करने की बात
डिप्टी सीएम ने कार्यक्रम में शिक्षकों को भी बच्चों की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों पर केवल पढ़ाई और अच्छे नंबर लाने का दबाव नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार बच्चों पर ‘ज्ञान का झंझट’ लादने की जरूरत है, ताकि वे केवल मार्कशीट और अंकों के तनाव में न रहें। उन्होंने शिक्षा को ज्ञान और व्यक्तित्व निर्माण से जोड़ने पर जोर दिया।
कबीर और रहीम के उदाहरण से समझाई शिक्षा की अहमियत
ब्रजेश पाठक ने अपने संबोधन में कवि कबीरदास और रहीमदास का उदाहरण देते हुए कहा कि वे किसी बड़े विश्वविद्यालय के टॉपर नहीं थे, लेकिन उनके विचार और दोहे आज भी पूरी दुनिया में पढ़े और गाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि केवल डिग्री या परीक्षा में प्राप्त अंक ही व्यक्ति की सफलता का पैमाना नहीं हो सकते। वास्तविक ज्ञान और प्रतिभा का महत्व कहीं अधिक है।
‘सरस्वती होगी तो लक्ष्मी अपने आप आएगी’
डिप्टी सीएम ने बदलते समय और शिक्षा की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि आज के दौर में ज्ञान सबसे महत्वपूर्ण पूंजी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास सरस्वती यानी ज्ञान है, तो लक्ष्मी यानी धन भी उसके पास अपने आप आने का रास्ता बना लेती है। उन्होंने युवाओं को ज्ञान, कौशल और प्रतिभा विकसित करने पर ध्यान देने की सलाह दी।
मोबाइल मेडिकल वैन से ग्रामीण क्षेत्रों में मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं
कार्यक्रम के दौरान मोबाइल मेडिकल वैन का भी शुभारंभ किया गया। इस पहल के तहत ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। मोबाइल मेडिकल वैन में ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, ईसीजी, रक्त जांच और नेत्र परीक्षण जैसी सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
मोबाइल मेडिकल वैन को मिली हरी झंडी
मोबाइल मेडिकल वैन को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व एचआरडी मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक, गोल्डी मसाले समूह के निदेशक सुदीप गोयनका और विधायक सुरेंद्र मैथानी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य सुविधाओं से दूर ग्रामीण और जरूरतमंद आबादी तक जांच एवं चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना है।
युवाओं के लिए संदेश और स्वास्थ्य सेवा, कार्यक्रम में दो अहम पहल
विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में एक ओर युवाओं को मोबाइल और सोशल मीडिया की बढ़ती लत से बचने का संदेश दिया गया, वहीं दूसरी ओर मोबाइल मेडिकल वैन के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की पहल की गई। ब्रजेश पाठक ने अपने संबोधन में ज्ञान, शिक्षा और बेहतर भविष्य पर जोर देते हुए युवाओं से डिजिटल मनोरंजन के बजाय अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की।

