UP Politics: भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने उत्तर प्रदेश में अपनी ही सरकार के दो प्रमुख विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला विभाग ‘जल जीवन मिशन’ है, जिसका लक्ष्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है, और दूसरा ‘विद्युत विभाग’ (बिजली विभाग) है, जिसका काम हर घर को रोशन करना है। बृजभूषण शरण सिंह ने इन दोनों विभागों पर विकास के नाम पर विनाश करने और जनता की जान जोखिम में डालने का आरोप लगाया है।
विकास के नाम पर विनाश का खेल
बृजभूषण शरण सिंह ने तीखे लहजे में कहा कि जल जीवन मिशन के नाम पर चारों तरफ अव्यवस्था फैलाई जा रही है। पाइपलाइन बिछाने के लिए पक्की सड़कों को बेरहमी से तोड़ दिया जाता है, लेकिन बाद में उन्हें ठीक नहीं किया जाता। इसी लापरवाही की वजह से आए दिन जानलेवा हादसे हो रहे हैं। उन्होंने हाल ही में गोंडा में हुई एक दुखद घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जल जीवन मिशन की खोदी गई सड़क के कारण सरिया से लदा एक ट्रक पलट गया, जिससे एक ही परिवार के तीन मासूम लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।
भ्रष्टाचार और एनओसी का खेल
पूर्व सांसद ने सरकारी तंत्र और निजी कंपनियों के गठजोड़ पर हमला बोलते हुए कहा कि ठेकेदारों या काम करने वाली कंपनियों के पास पक्की सड़कों को उजाड़ने के लिए किसी भी तरह की ‘अनापत्ति प्रमाणपत्र’ (NOC) नहीं होती है। बिना नियम-कानून के सड़कों को बर्बाद कर दिया जाता है और इतनी बड़ी लापरवाही व हादसों के बाद भी इन दागी कंपनियों का पूरा भुगतान (पेमेंट) कर दिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जनता की मौत का सौदा करने वाली इन कंपनियों पर लगाम क्यों नहीं कसी जा रही?
बिजली विभाग की जानलेवा सुस्ती
विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लेते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि जिले में बिजली विभाग की घोर लापरवाही के चलते हाल ही में दो लोगों की मौत हुई है। उन्होंने पूछा कि आखिर इन मौतों का असली जिम्मेदार कौन है? विभाग हमेशा कोई बड़ी अनहोनी या हादसा होने के बाद ही क्यों जागता है? आज स्थिति यह है कि बिजली के खंभों (पोल) पर खुलेआम करंट उतर रहा है, जिससे राह चलते लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं, लेकिन अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग
उन्होंने एक बेहद चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि अगर जल जीवन मिशन की मनमानी और विद्युत विभाग की बदइंतजामी की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो यह साफ हो जाएगा कि अब तक इन दोनों विभागों की वजह से कम से कम 4 से 5 हजार लोगों की जान जा चुकी है। इतने बड़े पैमाने पर हो रही मौतों के बावजूद शासन-प्रशासन के स्तर पर इसकी सुध लेने वाला और जनता के दर्द को समझने वाला कोई नहीं है।
बेअसर बैठकों और कार्रवाई न होने से उपजी लाचारी
बृजभूषण शरण सिंह ने अपनी ही सरकार के सामने लाचारी जाहिर करते हुए कहा कि पहले भी जिला स्तर की बैठकों में हम जनप्रतिनिधि इन जनहित के मुद्दों को पूरी ताकत से उठाते थे। लेकिन होता कुछ नहीं है, बैठक खत्म होते ही मुद्दा ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। उन्होंने बेहद निराश मन से कहा, “अब हम लोग क्या ही कर सकते हैं? सुबह उठ जाते हैं, यही हमारी गलती है। अब हम केवल मीडिया के सामने बोलकर अपनी भड़ास निकाल सकते हैं, क्योंकि हमारी सुनने वाला कोई नहीं है।”

