You are currently viewing Fish Rice Scheme: पश्चिम बंगाल में सिर्फ 5 रुपये में मिलेगा माछ-भात, सरकार शुरू करेगी 400 नई कैंटीन
पश्चिम बंगाल में सिर्फ 5 रुपये में मिलेगा माछ-भात

Fish Rice Scheme: पश्चिम बंगाल में सिर्फ 5 रुपये में मिलेगा माछ-भात, सरकार शुरू करेगी 400 नई कैंटीन

Fish Rice Scheme: पश्चिम बंगाल की राजनीति और संस्कृति में माछ-भात यानी मछली और चावल का खास महत्व माना जाता है। यह केवल एक भोजन नहीं बल्कि बंगाल की पहचान का हिस्सा है। अब राज्य सरकार ने इसी लोकप्रिय डिश को लेकर बड़ा ऐलान किया है। सरकार ने फैसला लिया है कि आम लोगों को केवल 5 रुपये में माछ-भात उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए राज्यभर में 400 विशेष कैंटीन शुरू की जाएंगी।

सरकार का कहना है कि इस योजना का मकसद गरीब और कामकाजी लोगों को कम कीमत में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। साथ ही बंगाल की पारंपरिक खाद्य संस्कृति को भी बढ़ावा देना है। यह घोषणा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

चुनाव के दौरान बना था बड़ा मुद्दा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान माछ-भात का मुद्दा काफी चर्चा में रहा था। उस समय विपक्ष और सत्ताधारी दल के बीच खानपान और संस्कृति को लेकर बयानबाजी भी हुई थी। चुनाव प्रचार के दौरान यह दावा किया गया था कि अगर बीजेपी सत्ता में आती है तो बंगाल के पारंपरिक भोजन पर असर पड़ सकता है।

हालांकि अब सरकार की ओर से माछ-भात को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की योजना पेश की गई है। इससे यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान और खानपान का सम्मान किया जाएगा।

“माछे-भाते बंगाली” कहावत का महत्व

बंगाल में “माछे-भाते बंगाली” कहावत काफी प्रसिद्ध है। इसका अर्थ है कि मछली और चावल बंगाली जीवनशैली का अहम हिस्सा हैं। राज्य के ज्यादातर घरों में यह भोजन रोजाना की थाली में शामिल होता है।

इसी सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस योजना को शुरू करने का फैसला लिया है। अधिकारियों का कहना है कि माछ-भात केवल भोजन नहीं बल्कि बंगाल की परंपरा और पहचान का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने किया बड़ा ऐलान

कल्याणी में आयोजित एक बैठक के दौरान मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने इस योजना की घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य में 400 कैंटीनों के जरिए लोगों को सब्सिडी दर पर माछ-भात उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री के अनुसार इन कैंटीनों का उद्देश्य गरीब, मजदूर और कम आय वाले लोगों को राहत देना है। महंगाई के दौर में कम कीमत पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

पहले अंडा-भात मिलता था

राज्य में पहले भी कम कीमत पर भोजन उपलब्ध कराने की योजनाएं चलाई जाती रही हैं। पूर्व सरकार के समय कई सरकारी कैंटीनों में 5 रुपये में अंडा-भात दिया जाता था। इन कैंटीनों का लाभ दिहाड़ी मजदूर, ऑटो चालक और जरूरतमंद लोग उठाते थे।

अब नई योजना में अंडे की जगह मछली को शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि मछली बंगाल के लोगों की पहली पसंद है, इसलिए माछ-भात को प्राथमिकता दी गई है।

गरीबों और मजदूरों को मिलेगा फायदा

इस योजना से सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को मिलने की उम्मीद है जो रोजाना कम आय में अपना गुजारा करते हैं। मजदूर, रिक्शा चालक और छोटे काम करने वाले लोग अब बेहद कम कीमत में पौष्टिक भोजन प्राप्त कर सकेंगे।

सरकार का कहना है कि 400 कैंटीनों के जरिए लाखों लोगों तक यह सुविधा पहुंचाई जाएगी। साथ ही इससे राज्य में खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सहायता को भी मजबूती मिलेगी।

राजनीति और संस्कृति दोनों से जुड़ा फैसला

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल एक सरकारी योजना नहीं बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा कदम भी है। माछ-भात को लेकर लोगों में भावनात्मक जुड़ाव है और सरकार इसी भावना को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ रही है। अब देखना होगा कि यह योजना जमीन पर कितनी सफल साबित होती है और आम लोगों को इससे कितना फायदा मिलता है।

Spread the love

Leave a Reply