You are currently viewing Jaish-e-Mohammed Pakistan:  गुजरात ATS ने जैश-ए-मोहम्मद के मॉड्यूल का किया भंडाफोड़; 8 संदिग्ध गिरफ्तार

Jaish-e-Mohammed Pakistan: गुजरात ATS ने जैश-ए-मोहम्मद के मॉड्यूल का किया भंडाफोड़; 8 संदिग्ध गिरफ्तार

Jaish-e-Mohammed Pakistan: पड़ोसी देश पाकिस्तान अपनी सरजमीं से भारत के खिलाफ लगातार खतरनाक आतंकी साजिशों को अंजाम देने की फिराक में रहता है। इसी कड़ी में पाकिस्तानी सरपरस्ती वाले खूंखार आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने भारत के भीतर अपने स्लीपर सेल और नेटवर्क को मजबूत करने का प्रयास किया था, जिसे गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने पूरी तरह से नाकाम कर दिया है। एटीएस की टीमों ने शुक्रवार (3 जुलाई 2026) को एक बड़े और खुफिया ऑपरेशन के तहत गुजरात और मध्य प्रदेश के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी करके आठ खतरनाक आरोपियों को दबोच लिया। आतंकवाद निरोधी दस्ते के मुताबिक, ये सभी पकड़े गए संदिग्ध देश के भीतर जैश के आतंकी जाल और अवैध नेटवर्क को तेजी से फैलाने के काम में जुटे हुए थे।

पकड़े गए राष्ट्रविरोधी तत्वों की हुई पहचान

आतंकवाद रोधी दस्ते द्वारा गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमाओं से गिरफ्तार किए गए इन आठों आरोपियों की पहचान उजागर कर दी गई है। पकड़े गए संदिग्धों के नाम अहमद अब्दुल्ला गाजीवाला, इब्राहिम मोहम्मद हुसैन घाघा, मुदस्सिर अब्दुल्ला गाजीवाला, जकारिया दुरानी मोहम्मद अम्मार घाघा, मुफ्ती फौजान इस्माइल दौवा, मोहम्मद अमीन शेरा, मोहम्मद अब्दुल रहमान सावदी और बिलाल दुरानी मोहम्मद अम्मार घाघा हैं। इन सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों और देश के खुफिया तंत्र ने अपनी चौकसी और अधिक बढ़ा दी है, ताकि संगठन से जुड़े अन्य संभावित मददगारों का भी पता लगाया जा सके।

गुजरात को केंद्र बनाकर सक्रिय टेरर नेटवर्क स्थापित करने की थी योजना

गुजरात एटीएस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए ये सभी आरोपी कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद की हिंसक और आतंकवादी गतिविधियों को भारतीय सरजमीं पर बढ़ावा देने के लिए दिन-रात काम कर रहे थे। इनका मुख्य उद्देश्य गुजरात राज्य को केंद्र बनाकर एक बड़ा और बेहद सक्रिय टेरर नेटवर्क (आतंकी मॉड्यूल) खड़ा करना था। देश की संप्रभुता को चुनौती देने वाले इन देशद्रोहियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसते हुए गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए (UAPA) के कड़े सेक्शन 13, 17, 18, 38 और 39 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके अलावा, नए कानूनी प्रावधानों के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धारा 148 और 61 भी इनके खिलाफ लगाई गई है।

मसूद अजहर के संगठन का काला इतिहास

कुख्यात आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना साल 2000 में वैश्विक आतंकवादी मसूद अजहर द्वारा पाकिस्तान में की गई थी। यह कट्टरपंथी और हिंसक संगठन भारत की सीमाओं के भीतर अब तक छह बड़े और विनाशकारी आतंकवादी हमलों को अंजाम देकर देश को दहला चुका है। जैश ने अपने जन्म के तुरंत बाद अप्रैल 2000 में भारतीय सेना के स्थानीय मुख्यालय पर एक कायराना आत्मघाती हमला करवाया था, जिसे जम्मू-कश्मीर में महज 17 साल के एक गुमराह किशोर आतंकी ने अंजाम दिया था। इसके बाद, अक्टूबर 2001 में इस संगठन ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा परिसर को अपना निशाना बनाया था, जिसमें भारी नुकसान हुआ था।

पठानकोट से लेकर उरी और पुलवामा तक

इस खूंखार पाकिस्तानी संगठन का खूनी इतिहास यहीं नहीं रुका। जैश-ए-मोहम्मद ने जनवरी 2016 में पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर हमला करके भारत की सामरिक सुरक्षा को बड़ी चुनौती दी थी। इसी साल सितंबर 2016 में, जैश के आतंकियों ने उरी स्थित सेना के ब्रिगेड मुख्यालय पर एक और बड़ा हमला किया, जिसके जवाब में भारत ने ऐतिहासिक सर्जिकल स्ट्राइक की थी। इसके अलावा, साल 2019 में पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के काफिले पर हुआ भीषण और आत्मघाती आईईडी (IED) ब्लास्ट भी इसी संगठन की सबसे बर्बर करतूतों में से एक था। वर्तमान में, गुजरात पुलिस और एटीएस की मुस्तैदी के कारण इस बार जैश अपने नापाक मंसूबों में कामयाब नहीं हो सका और समय रहते उसकी पूरी रीढ़ तोड़ दी गई।

Spread the love

Leave a Reply