Hamirpur Bridge Collapse: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में हुए भीषण पुल हादसे को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। परसानी और कंदौर गांवों के बीच बेतवा नदी पर चल रहे इस निर्माण कार्य के दौरान हुए हादसे के तुरंत बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया है। इस लापरवाही पर त्वरित कदम उठाते हुए शासन ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता (असिस्टेंट इंजीनियर) गजेंद्र कुमार चौधरी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है। सरकार की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से लापरवाह अफसरों में हड़कंप मच गया है।
विभागीय अधिकारियों और प्रोजेक्ट मैनेजर पर गिरी गाज
सहायक अभियंता के निलंबन के साथ ही सरकार ने इस निर्माण परियोजना से जुड़े अन्य बड़े चेहरों पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में ड्यूटी पर तैनात प्रोजेक्ट मैनेजर (डीपीएम) दिलीप कुमार के खिलाफ गंभीर प्रशासनिक शिथिलता बरतने के आरोप में विभागीय दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि बुनियादी ढांचे के निर्माण में किसी भी स्तर पर बरती गई कोताही या लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और घटना की तह तक जाकर असली गुनहगारों को बेनकाब किया जाएगा।
निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी खामियों की सघन जांच शुरू
मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर इस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की तकनीकी जांच को बेहद तेज कर दिया गया है। विशेष रूप से गठित की गईं एक्सपर्ट और तकनीकी टीमों से निर्माण स्थल की विस्तृत फॉरेंसिक और मटेरियल रिपोर्ट मांगी गई है। इस उच्च स्तरीय जांच के दायरे में पुल निर्माण की सामग्री की गुणवत्ता, साइट पर सुरक्षा और निगरानी की मुकम्मल व्यवस्था के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी बारीकी से पड़ताल की जा रही है। जांच अधिकारियों को दो टूक हिदायत दी गई है कि वे बिना किसी बाहरी दबाव के निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से अपनी फाइनल रिपोर्ट शासन को सौंपें।
भ्रष्टाचार और लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस की नीति
उत्तर प्रदेश शासन ने एक बार फिर दोहराया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीति पूरी तरह स्पष्ट है। किसी भी सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजना में यदि कोई अप्रिय दुर्घटना होती है, तो उसकी उच्चतम स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी। दोषियों को सख्त से सख्त कानूनी सजा मिलना बिल्कुल तय है। सरकार ने कड़े लहजे में यह भी साफ कर दिया है कि हादसे के गुनहगार चाहे कितने भी रसूखदार अधिकारी, कर्मचारी या ठेकेदार क्यों न हों, उन्हें किसी भी कीमत पर सरकारी संरक्षण नहीं दिया जाएगा और उनके खिलाफ कठोरतम दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।
तड़के आए अंधड़ में ढहा स्लैब, ६ श्रमिकों की दर्दनाक मौत
गौरतलब है कि हमीरपुर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर लालपुरा थाना क्षेत्र में शुक्रवार (29 मई) तड़के लगभग तीन बजे यह दर्दनाक हादसा हुआ था। मूसलाधार बारिश और तेज चक्रवाती आंधी के दौरान बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का एक भारी-भरकम स्लैब भरभराकर नीचे गिर गया। उस वक्त कई मजदूर दिनभर की थकावट के बाद उसी स्लैब के ऊपरी हिस्से पर गहरी नींद में सो रहे थे। इस भयावह दुर्घटना में ६ निर्माण श्रमिकों की मलबे में दबने से मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की शिनाख्त लोकेंद्र, कुलदीप निषाद, सावंत यादव, सभाजीत, पुष्पेंद्र चौहान और राजेश पाल के रूप में हुई है, जबकि मलबे से सुरक्षित निकाले गए तीन अन्य घायल श्रमिकों अवधेश, कल्लू और राजेश निषाद का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।

