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Maratha Reservation: मनोज जरांगे पाटिल की फिर भूख हड़ताल, बैकफुट पर आई सरकार

Maratha Reservation: मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल ने आज सुबह 11 बजे से जालना के अंतरवाली सराटी में एक बार फिर अपना अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है। जरांगे के इस कड़े कदम से महाराष्ट्र सरकार के भीतर हड़कंप मच गया है। इससे ठीक एक दिन पहले, शुक्रवार को राज्य के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और भाजपा नेता प्रसाद लाड ने करीब डेढ़ घंटे तक उन्हें मनाने की पुरजोर कोशिश की थी, लेकिन वह वार्ता पूरी तरह बेनतीजा रही थी।

सरकार की बढ़ी बेचैनी: सीएम के फोन के बाद दौड़ पड़े सरकारी दूत

मनोज जरांगे के अड़े रहने के बाद प्रशासन तुरंत हरकत में आया और उनकी मांगों का सकारात्मक समाधान खोजने के लिए एक विशेष आधिकारिक मसौदा प्रस्ताव तैयार किया गया। इस बीच, राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब मुंबई के लिए रवाना हो चुके भाजपा नेता प्रसाद लाड को उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का फोन आया। सीएम के निर्देश के बाद प्रसाद लाड आधे रास्ते से वापस लौट आए और दोबारा अंतरवाली सराटी की ओर कूच किया। कुछ ही समय पहले उप-समिति के अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल ने भी जरांगे से मुलाकात कर गतिरोध सुलझाने का प्रयास किया।

सरकारी मसौदे के मुख्य बिंदु: आंदोलनकारियों को शांत करने के लिए प्रशासन का नया प्रस्ताव

चिलचिलाती गर्मी और स्वास्थ्य के जोखिम के बावजूद जरांगे पाटिल अपने रुख पर कायम हैं। सरकार द्वारा तैयार किए गए नए मसौदे में आंदोलनकारियों को मनाने के लिए कई महत्वपूर्ण आश्वासन शामिल किए गए हैं:

  • मराठा आरक्षण प्रकोष्ठ: आगामी एक महीने के भीतर इस विशेष सेल का गठन किया जाएगा।
  • हेल्पलाइन की शुरुआत: जाति सत्यापन, रिकॉर्ड प्राप्त करने और प्रमाण पत्र जारी करने के लिए 8 दिनों में हेल्पलाइन शुरू होगी।
  • कुनबी प्रमाण पत्र एसओपी: कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की गई है।
  • आर्थिक सहायता: आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले शहीदों के परिवारों को 15 दिनों के भीतर वित्तीय मदद दी जाएगी।
  • अधिकारियों पर गाज: काम में लापरवाही बरतने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

कानून और सौहार्द का संतुलन

इस पूरे सियासी घटनाक्रम और आरक्षण विवाद पर बोलते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकार का रुख साफ किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र सरकार मराठा आरक्षण के मुद्दे पर पूरी तरह सकारात्मक है और समाज के सर्वोत्तम हित में काम कर रही है। फडणवीस ने जोर देकर कहा कि सरकार का उद्देश्य समुदायों के बीच टकराव पैदा करना नहीं है, बल्कि एक ऐसा रास्ता निकालना है जो संवैधानिक दायरे में हो और जिसे कानूनी रूप से चुनौती न दी जा सके।

दोनों वर्गों को साधने की चुनौती

सीएम फडणवीस ने ओबीसी समुदाय की चिंताओं को दूर करते हुए साफ कहा कि किसी एक वर्ग का हक छीनकर दूसरे को देने की नीति सरकार की नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ओबीसी समुदाय के आरक्षण से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी और उनके साथ कोई अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य मराठा समुदाय की मांगों को भी संतोषजनक ढंग से पूरा करना है। फिलहाल, सभी की निगाहें अंतरवाली सराटी में चल रही इस बातचीत पर टिकी हैं कि क्या इस बार कोई ठोस समाधान निकल पाएगा।

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