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UP News: पीलीभीत में बनेगा यूपी का बड़ा बायो-फार्मा पार्क, 200 एकड़ में होगा वैक्सीन और इंसुलिन का निर्माण

UP News: उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए योगी सरकार अब छोटे शहरों और तराई क्षेत्रों में भी बड़े निवेश की संभावनाएं तलाश रही है। इसी कड़ी में पीलीभीत को बायो-फार्मा उद्योग के नए ठिकाने के रूप में विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की ओर से अमरिया तहसील के भरा पचपेड़ा में 951.79 एकड़ जमीन पर आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है।

इस पूरे प्रोजेक्ट में 200 एकड़ जमीन बायो-फार्मा पार्क के लिए रखी गई है। उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल के डायरेक्टर और विशेष विशेषज्ञ डॉ. जीएन सिंह के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कोशिश है कि प्रदेश में उद्योगों का विस्तार सिर्फ नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ जैसे बड़े शहरों तक सीमित न रहे। दूसरे जिलों में भी निवेश पहुंचे और वहां के युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार मिल सके।

बायो-फार्मा पार्क में बनेंगी वैक्सीन, इंसुलिन और आधुनिक दवाएं

पीलीभीत में बनने वाला बायो-फार्मा पार्क सामान्य दवा निर्माण इकाइयों से अलग होगा। यहां आधुनिक तकनीक से तैयार होने वाली जैविक औषधियों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें वैक्सीन, इंसुलिन, जीन थेरेपी और मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज बनाने वाली कंपनियों को प्राथमिकता देने की योजना है।

ये दवाएं कई गंभीर बीमारियों के इलाज में अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में पार्क के शुरू होने से उत्तर प्रदेश में हाईटेक दवा निर्माण को बढ़ावा मिल सकता है। इसके साथ ही फार्मा फॉर्मूलेशन और बायोटेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों को भी यहां अपनी इकाइयां लगाने का अवसर मिलेगा।

पीलीभीत औद्योगिक क्षेत्र में जमीन और सुविधाओं का पूरा प्लान

भरा पचपेड़ा में विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्र में अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से जमीन तय की गई है। कुल क्षेत्रफल में 575.79 एकड़ औद्योगिक भूखंडों के लिए रखा गया है। वहीं, 60.98 एकड़ में कॉमन फैसिलिटी, 109.23 एकड़ में हरित क्षेत्र और 96.20 एकड़ में सड़क नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इसके अलावा आबादी क्षेत्र और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए भी जमीन निर्धारित की गई है।

फिलहाल औद्योगिक क्षेत्र में 14 भूखंड आवंटन के लिए उपलब्ध हैं। सरकार का मकसद यहां ऐसा औद्योगिक माहौल तैयार करना है, जहां कंपनियों को उत्पादन के साथ जरूरी बुनियादी सुविधाएं भी मिल सकें।

नेपाल सीमा से नजदीकी और बेहतर कनेक्टिविटी से मिलेगा फायदा

पीलीभीत को बायो-फार्मा उद्योग के लिए चुनने के पीछे इसकी भौगोलिक स्थिति भी एक बड़ी वजह है। यह इलाका नेपाल सीमा के नजदीक है और यहां रेलवे कनेक्टिविटी भी उपलब्ध है। भरा पचपेड़ा औद्योगिक क्षेत्र पीलीभीत शहर से करीब 36 किलोमीटर और बरेली से लगभग 100 किलोमीटर दूर है। वहीं, लखनऊ और दिल्ली से इसकी दूरी करीब 300 किलोमीटर है।

इस कनेक्टिविटी से कच्चा माल मंगाने और तैयार दवाओं को दूसरे शहरों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। नेपाल सीमा के पास होने से भविष्य में निर्यात और क्षेत्रीय व्यापार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट और स्किल डेवलपमेंट से युवाओं को मिलेगा मौका

इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि सरकार का ध्यान केवल फैक्ट्रियां लगाने पर नहीं है। बायोटेक्नोलॉजी और फार्मा सेक्टर के लिए कुशल युवाओं को तैयार करने की भी योजना बनाई जा रही है। इसके तहत बायोटेक्नोलॉजी टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट विकसित करने के साथ स्किल डेवलपमेंट और इंक्यूबेशन के लिए विशेष विंग बनाने का प्रस्ताव है।

इससे युवाओं को नई तकनीकों की ट्रेनिंग मिल सकेगी और उन्हें उद्योगों की जरूरत के मुताबिक तैयार किया जा सकेगा। साथ ही नए स्टार्टअप और रिसर्च को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, पीलीभीत का यह बायो-फार्मा पार्क तराई क्षेत्र में निवेश, आधुनिक दवा निर्माण और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।

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