Ram Mandir News: अयोध्या के भव्य राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित गबन और चोरी के मामले ने अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस पूरे प्रकरण में समाजवादी पार्टी (SP) के शीर्ष नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि मंदिर गबन मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से कई बार फोन पर बातचीत हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे-जैसे इस वित्तीय गड़बड़ी (Financial Irregularity) की परतें खुलेंगी, इस चोरी के पीछे छिपे असली चेहरे देश के सामने आ जाएंगे।
दिग्विजय सिंह पर तीखा पलटवार
इस राजनीतिक विवाद में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के बयानों पर भी सत्ताधारी दल ने तीखा हमला बोला है। दरअसल, दिग्विजय सिंह ने ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ के दौरान कहा था कि वे राम मंदिर निर्माण चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और गड़बड़ी पाए जाने पर अपना दान ब्याज सहित वापस मांगेंगे। इस पर पलटवार करते हुए बीजेपी नेता अजय आलोक ने कहा कि दिग्विजय सिंह पहले अपने दान की रसीद दिखाएं, मंदिर ट्रस्ट उन्हें ब्याज सहित पैसा लौटा देगा क्योंकि ऐसे नास्तिकों का चंदा भगवान राम के चरणों में नहीं होना चाहिए। हालांकि, दिग्विजय सिंह ने खुद को सनातन परंपरा का सच्चा अनुयायी बताते हुए इन आरोपों को खारिज किया है।
विश्व हिंदू परिषद का बड़ा कदम
दूसरी तरफ, विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इस मामले में सीधे तौर पर विपक्षी गठबंधन के बड़े नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने इस पूरे मामले के जांच अधिकारी (Investigating Officer) को एक औपचारिक पत्र लिखा है। इस शिकायती पत्र में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, सपा नेता रामगोपाल यादव, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और राज्यसभा सांसद संजय सिंह के सार्वजनिक बयानों की गहनता से जांच कराने की मांग उठाई गई है।
जांच एजेंसी से पूछताछ की अपील
विहिप ने जांच एजेंसी से मांग की है कि जिन भी राजनेताओं ने राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट पर 20,000 करोड़ रुपये तक की भारी वित्तीय अनियमितताओं और जमीन खरीद में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं, उन्हें तत्काल समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया जाए। वीएचपी का कहना है कि इन नेताओं से यह पूछा जाना चाहिए कि उनके इन गंभीर आरोपों का आधार क्या है और क्या उनके पास इन दावों के समर्थन में कोई प्रामाणिक दस्तावेज या साक्ष्य मौजूद हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी इसकी जानकारी साझा करते हुए संगठन ने कहा कि अगर विपक्षी दल कोई विश्वसनीय सबूत (Credible Evidence) पेश करते हैं, तो इससे जांच एजेंसियों को निष्पक्षता से सच्चाई तक पहुंचने में बड़ी मदद मिलेगी।

