UP Textile Park: संतकबीरनगर के मगहर स्थित बंद पड़ी संत कबीर कताई मिल्स लिमिटेड में एक बार फिर औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 11 अगस्त 2026 को कांशीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मिल क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को तेज करने की घोषणा के बाद प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क की स्थापना की प्रक्रिया में तेजी आई है। पार्क के संचालन के बाद जिले में रोजगार और औद्योगिक विकास के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
टेक्सटाइल पार्क से 5 हजार से अधिक रोजगार के अवसर
प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क में कपड़ा उद्योग से जुड़ी विभिन्न इकाइयां स्थापित की जाएंगी। यहां सूत से धागा तैयार करने से लेकर धागे से कपड़ा बनाने, फिनिशिंग, रंगाई, साइजिंग और प्रिंटिंग जैसी गतिविधियां संचालित होंगी। इसके अलावा रेडीमेड गारमेंट तैयार करने वाली इकाइयां भी स्थापित किए जाने की योजना है।
टेक्सटाइल पार्क के लिए निवेशकों से आवेदन लेने की प्रक्रिया चल रही है। प्राप्त आवेदनों के आधार पर निवेशकों का चयन शासन स्तर से किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार पार्क के पूरी तरह संचालित होने पर पांच हजार से अधिक बेरोजगारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है।
निवेशकों से आवेदन, शासन स्तर पर होगा चयन
पार्क में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए निवेशकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद शासन स्तर से निवेश प्रस्तावों का परीक्षण कर चयन किया जाएगा। इससे बंद पड़ी कताई मिल की भूमि का औद्योगिक उपयोग सुनिश्चित होने के साथ क्षेत्र में नए निवेश का रास्ता खुलेगा।
निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए विद्युत उपकेंद्र की तैयारी
टेक्सटाइल पार्क के संचालन में बिजली की कमी बाधा न बने, इसके लिए विद्युत उपकेंद्र स्थापित करने की कवायद भी शुरू हो गई है। प्रस्तावित औद्योगिक पार्क में कितनी बिजली की आवश्यकता होगी, इसका आकलन विद्युत विभाग की टीम कर रही है।
कुछ दिन पूर्व ट्रांसमिशन के एसडीओ मनोज कुमार के नेतृत्व में टीम बंद संत कबीर कताई मिल परिसर पहुंची थी। टीम ने प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क की संभावित विद्युत आवश्यकता का जायजा लिया। इस दौरान विद्युत वितरण खंड-खलीलाबाद के एक्सईएन राजेश कुमार तथा हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग के अधिकारियों से भी चर्चा की गई।
बिजली की मांग का आकलन कर तैयार होगी व्यवस्था
अधिकारियों का उद्देश्य पार्क के संचालन से पहले पर्याप्त विद्युत व्यवस्था तैयार करना है, ताकि औद्योगिक इकाइयों को निर्बाध बिजली मिल सके। इसके लिए प्रस्तावित पार्क की उत्पादन क्षमता और स्थापित होने वाली इकाइयों के आधार पर बिजली की मांग का आकलन किया जा रहा है।
कताई मिल बंद होने से हजारों मजदूर हुए थे बेरोजगार
संत कबीर कताई मिल्स लिमिटेड-मगहर कभी पूर्वांचल के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल थी। गुजरात के सूरत, अहमदाबाद और वड़ोदरा सहित अन्य क्षेत्रों से मिल में सूत आता था, जिसकी कताई कर धागा तैयार किया जाता था। इस धागे की आपूर्ति कपड़ा मिलों और छोटे उद्यमियों के साथ-साथ बुनकरों को भी की जाती थी।
मिल से तैयार धागा बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, अंबेडकरनगर के टांडा, बाराबंकी, कानपुर और लखनऊ सहित कई क्षेत्रों में भेजा जाता था। बड़ी संख्या में बुनकर इसी धागे से कपड़ा तैयार कर अपनी आजीविका चलाते थे।
1990 में मिल बंद होने से टूटा रोजगार का बड़ा आधार
वर्ष 1990 में कताई मिल बंद होने के बाद यहां कार्यरत तीन हजार से अधिक कर्मचारी बेरोजगार हो गए थे। मिल बंद होने का असर आसपास के बुनकरों और छोटे कपड़ा कारोबारियों पर भी पड़ा। कई बुनकरों ने अपना पुश्तैनी काम छोड़कर दूसरे राज्यों का रुख कर लिया।
टेक्सटाइल पार्क से बदलेगी जिले की औद्योगिक तस्वीर
सहायक आयुक्त, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग, परिक्षेत्र-गोरखपुर सिद्धार्थ सिंह के अनुसार, कताई मिल की भूमि की रजिस्ट्री हो चुकी है। टेक्सटाइल पार्क की स्थापना और संचालन से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां तेज होंगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे संतकबीरनगर की औद्योगिक तस्वीर में व्यापक बदलाव आने की उम्मीद है।

