West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। इसी कड़ी में एक बेहद चौंकाने वाले और बड़े घटनाक्रम के तहत दक्षिण 24 परगना के अमताला इलाके में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर भारी सुरक्षा इंतजामों के बीच एक बड़ा अतिक्रमण-विरोधी अभियान चलाया गया। जिला प्रशासन ने अवैध निर्माण की शिकायतों के आधार पर यह कड़ी कार्रवाई की है, जिसने राज्य की सियासत में भारी हलचल पैदा कर दी है।
अवैध निर्माण पर दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अमताला स्थित अभिषेक बनर्जी का यह दफ्तर विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद से ही लगातार बंद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि इस परिसर में कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण किया गया था, जिसके संदर्भ में दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन की ओर से बकायदा आधिकारिक नोटिस भी जारी किया गया था।
“नोटिस जारी होने के बावजूद निर्धारित समय सीमा के भीतर जिला परिषद के समक्ष टीएमसी या सांसद का कोई भी प्रतिनिधि अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हुआ। इसी लापरवाही और नियमों के उल्लंघन के बाद अधिकारियों ने सरकारी नियमानुसार बेदखली और विध्वंस की विधिक प्रक्रिया शुरू की।” – प्रशासनिक सूत्र
कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए डायमंड हार्बर पुलिस जिले के जवानों की एक बहुत बड़ी टुकड़ी को इलाके में तैनात किया गया था, जिसने पूरे परिसर को अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया था।
बुलडोजर कार्रवाई देखने उमड़ी भारी भीड़
अमताला में जैसे ही जिला प्रशासन का दस्ता बुलडोजर और मलबे हटाने वाली मशीनों के साथ पहुंचा, इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम और बुलडोजर एक्शन को अपनी आंखों से देखने के लिए स्थानीय लोगों की एक बहुत बड़ी भीड़ मौके पर जमा हो गई। किसी भी संभावित राजनीतिक टकराव, विरोध प्रदर्शन या अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस बल ने भीड़ को एक निश्चित दूरी पर रोके रखा। इलाके में तनावपूर्ण शांति को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा पूरे घटनाक्रम पर पैनी और कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
सांसद अभिषेक बनर्जी का पलटवार
इस बड़ी प्रशासनिक और जमीनी कार्रवाई से पहले ही टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने नवनिर्वाचित सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। बीते 3 जुलाई को एक बयान जारी कर बनर्जी ने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) जैसी शीर्ष एजेंसियां उनके दफ्तर से जुड़े कर्मचारियों और करीबियों को जानबूझकर डरा-धमका रही हैं और मानसिक रूप से परेशान कर रही हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए दावा किया था कि राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से ग्रसित होकर उनके कार्यालय से जुड़े लगभग 25 लोगों को बिना किसी उचित विधिक नोटिस के और सभी कानूनी सुरक्षा उपायों का सरेआम उल्लंघन करते हुए पूछताछ के लिए समन किया गया या फिर अवैध रूप से हिरासत में लिया गया। इस दफ्तर पर हुई कार्रवाई के बाद अब टीएमसी और सत्ताधारी दल के बीच जुबानी जंग और तेज होने के आसार हैं।

