UP News: उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने सोमवार को अपने कार्यकाल का एक सफल वर्ष पूरा कर लिया है। इस विशेष अवसर पर उन्होंने पुलिस मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता को संबोधित किया। डीजीपी ने पिछले एक साल के दौरान राज्य की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक सुधारों और पुलिसिंग के मोर्चे पर हासिल हुई बड़ी कामयाबियों का ब्यौरा पेश किया। उन्होंने बताया कि बीते एक वर्ष में पुलिस विभाग ने 10 प्रमुख प्राथमिकताओं को केंद्र में रखकर काम किया, जिसके बेहद सकारात्मक परिणाम जमीन पर दिखाई दे रहे हैं।
महिला सुरक्षा और अपराध नियंत्रण
डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ (कतई बर्दाश्त न करने) की नीति को पूरी सख्ती से लागू किया गया है। पिछले सात-आठ वर्षों के तुलनात्मक आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में अपराध के ग्राफ में भारी गिरावट दर्ज की गई है। महिला सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा को पुलिस विभाग ने अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता माना है।
‘मिशन शक्ति अभियान’ के तहत पूरे प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर विशेष मुस्तैदी दिखाई गई। इसके लिए जमीनी स्तर पर तैनात पुलिसकर्मियों को खास तौर पर प्रशिक्षित किया गया, ताकि वे महिलाओं से जुड़े मामलों में अधिक संवेदनशीलता और तत्परता से काम कर सकें। समाज में दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अन्य अपराधों के प्रति बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाए गए। डीजीपी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि पुलिस की इन चौतरफा कोशिशों की बदौलत राज्य में महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों में 9.5 प्रतिशत से लेकर 33 प्रतिशत तक की भारी कमी आई है।
साइबर क्राइम और ऑनलाइन ठगी पर एक्शन
प्रेसवार्ता के दौरान डीजीपी ने डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराध को कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी और उभरती हुई चुनौती स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के बाद से ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर ठगी के मामलों में तेजी से उछाल आया है। इस आधुनिक चुनौती से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को तकनीकी रूप से अपग्रेड किया जा रहा है। इसी रणनीति के तहत विभाग के 62 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को साइबर क्राइम से निपटने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
साइबर अपराधियों के खिलाफ यूपी पुलिस को एक बहुत बड़ी कामयाबी भी हाथ लगी है। डीजीपी ने बताया कि पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी का शिकार हुए लोगों के करीब 450 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि को डूबने से बचाया और उसे बीच में ही रुकवा दिया। यह रकम देश के किसी भी राज्य में साइबर फ्रॉड के खिलाफ की गई अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी और कार्रवाईयों में शामिल है। इसके अलावा, अब शातिर और फरार अपराधियों पर नकेल कसने के लिए पुलिस कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस – AI) आधारित आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है। एआई की मदद से संदिग्धों की पहचान और उनकी डिजिटल निगरानी आसान हुई है, जिसके परिणामस्वरूप कई लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा गया है।
पुलिस वेलफेयर और स्वास्थ्य योजनाएं
डीजीपी राजीव कृष्ण ने अपनी प्राथमिकताओं में पुलिस वेलफेयर यानी पुलिस कल्याण योजनाओं को भी बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले पुलिसकर्मियों का ध्यान रखना विभाग की जिम्मेदारी है। विभिन्न दुर्घटनाओं और ऑन-ड्यूटी अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीद पुलिसकर्मियों के आश्रितों और परिजनों की मदद के लिए विभाग ने तत्परता दिखाई है। बीते एक साल में ऐसे परिवारों को कुल 137 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और अनुग्रह राशि उपलब्ध कराई गई है।
जवानों के स्वास्थ्य और उनकी बुनियादी सुविधाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि लगभग 51 हजार पुलिसकर्मियों को पूरी तरह से नि:शुल्क (फ्री) चिकित्सा और इलाज की सुविधा प्रदान की गई है। इसके साथ ही, मैदानी इलाकों और थानों में तैनात पुलिसकर्मियों के रहने की समस्या को दूर करने के लिए विभाग एक बड़ी बुनियादी ढांचा योजना पर काम कर रहा है। इसके अंतर्गत पुलिस लाइंस और थानों में 200 की क्षमता वाले आधुनिक छात्रवासों (बैरक और हॉस्टल्स) के निर्माण की रूपरेखा तैयार की गई है, जिससे जवानों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।
नए आपराधिक कानून और डिजिटल ई-समन व्यवस्था
देश में लागू हुए नए आपराधिक कानूनों को उत्तर प्रदेश में प्रभावी और पारदर्शी तरीके से लागू करने के लिए पुलिस महकमा पूरी तरह गंभीर है। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि नए कानूनों की बारीकियों को समझने के लिए हर स्तर के पुलिस अधिकारियों और जांचकर्ताओं को व्यापक ट्रेनिंग दी जा रही है। अब पुलिस का मुख्य जोर तय समय सीमा के भीतर अदालतों में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल करने, मामलों की वैज्ञानिक जांच करने और पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (डिजिटल एविडेंस) जुटाने पर है।
इसी आधुनिकीकरण के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस ‘ई-समन व्यवस्था’ को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। इस नई डिजिटल प्रणाली के जरिए अब अदालतों द्वारा जारी किए जाने वाले समन और वारंट सीधे थानों तक बिना किसी देरी के डिजिटल माध्यम से पहुंचाए जा रहे हैं। डीजीपी ने जानकारी दी कि राज्य के 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में यह पेपरलेस और त्वरित डिजिटल व्यवस्था पूरी तरह लागू हो चुकी है, जिससे अदालती कामकाज और पुलिस तामीली की गति कई गुना बढ़ गई है।
माफिया नेटवर्क और संगठित अपराध पर प्रहार
प्रेसवार्ता के अंतिम चरण में डीजीपी ने आतंकवाद के बदलते और आधुनिक स्वरूप को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आगाह किया कि सीमा पार बैठे देश विरोधी तत्व अब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए देश के युवाओं को गुमराह करने और उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेलने की साजिश रच रहे हैं। हालांकि, यूपी पुलिस की स्पेशल विंग्स पूरी तरह अलर्ट हैं। एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने हालिया दिनों में मुस्तैदी दिखाते हुए सोशल मीडिया के जरिए देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त 12 से 13 संदिग्धों को गिरफ्तार कर उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया है।
डीजीपी राजीव कृष्ण ने पुलिस महकमे के भीतर अनुशासन को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी कि जनता की सेवा और सुरक्षा में किसी भी स्तर पर पुलिसकर्मियों की लापरवाही या ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी। आने वाले समय की रणनीति साझा करते हुए उन्होंने संकल्प जताया कि प्रदेश में संगठित अपराध और उससे जुड़े ‘सफेदपोश’ अपराधियों (माफियाओं को संरक्षण देने वाले रसूखदार लोगों) के खिलाफ और ज्यादा आक्रामक अभियान चलाया जाएगा। पुलिस का मुख्य लक्ष्य अब माफिया नेटवर्क की आर्थिक कमर (फाइनेंशियल रीढ़) को पूरी तरह से तोड़ना है, ताकि आम नागरिकों, महिलाओं, व्यापारियों और उद्योगपतियों के भीतर सुरक्षा का भरोसा और ज्यादा मजबूत हो सके।

