उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को गाजियाबाद पहुंचकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी अभियान की शुरुआत कर दी। यहां उन्होंने करीब डेढ़ किलोमीटर तक पदयात्रा की और जनता के बीच पहुंचकर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की।
भाजपा के इस अभियान को ‘मिशन-71’ नाम दिया जा रहा है। इसकी वजह भी साफ है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुल 71 विधानसभा सीटें हैं और पार्टी की नजर इन सभी सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने पर है। गाजियाबाद से शुरू हुई इस पदयात्रा को चुनाव से पहले भाजपा के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
गाजियाबाद को ही क्यों चुना गया? BJP की रणनीति पर चर्चा
गाजियाबाद लंबे समय से भाजपा के मजबूत राजनीतिक केंद्रों में शामिल रहा है। ऐसे में पश्चिमी यूपी के बड़े चुनावी अभियान की शुरुआत के लिए इस जिले को चुनना कई मायनों में अहम माना जा रहा है। योगी आदित्यनाथ की पदयात्रा में उमड़ी भीड़ ने भी राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है।
पदयात्रा से पहले मुख्यमंत्री ने जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर जमकर हमला बोला। भाजपा की कोशिश है कि चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी में पार्टी के कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जाए और जनता के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत बनाया जाए।
2021 के रोड शो की याद दिला रही योगी की पदयात्रा
गाजियाबाद से चुनावी अभियान शुरू करने के पीछे भाजपा का पुराना अनुभव भी अहम हो सकता है। साल 2021 में विधानसभा चुनाव से पहले दिसंबर की सर्द रात में योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद से ही बड़ा रोड शो किया था। उस समय इस रोड शो ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में काफी राजनीतिक चर्चा बटोरी थी।
अब विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री ने एक बार फिर इसी जिले से पदयात्रा कर चुनावी संदेश दिया है। राजनीतिक जानकार इसे भाजपा की सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं। पार्टी को उम्मीद है कि गाजियाबाद से शुरू हुआ अभियान आसपास के जिलों और पश्चिमी यूपी की दूसरी विधानसभा सीटों पर भी असर डालेगा।
71 सीटों पर भाजपा की नजर, 12 सीटों का नुकसान बना चुनौती
पश्चिमी उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण क्षेत्र है। संगठन की दृष्टि से मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल को मिलाकर पश्चिम क्षेत्र बनाया गया है। इन तीनों मंडलों में विधानसभा की कुल 71 सीटें आती हैं।
साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन किया था। हालांकि, पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को इन तीन मंडलों में कुल 12 सीटों का नुकसान हुआ। ऐसे में इस बार भाजपा के सामने अपनी पुरानी स्थिति मजबूत करने की चुनौती है।
यही वजह है कि पार्टी ने अभी से पश्चिमी यूपी में चुनावी गतिविधियां बढ़ानी शुरू कर दी हैं। ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के जरिए भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश भरने और जनता तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
RLD और किसान वोटों पर भी भाजपा का फोकस
पश्चिमी यूपी की राजनीति में राष्ट्रीय लोकदल का प्रभाव किसी से छिपा नहीं है। खासकर किसान बहुल इलाकों में रालोद की राजनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए जनसभा के मंच पर रालोद के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी को अग्रिम पंक्ति में जगह दी गई। उनके साथ पार्टी के चार अन्य पदाधिकारी भी मंच पर मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में किसानों से जुड़े मुद्दों को उठाया। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भी याद किया। भाजपा के इस कदम को पश्चिमी यूपी के किसान वर्ग और रालोद के समर्थकों के बीच सकारात्मक संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर गाजियाबाद से शुरू हुई योगी आदित्यनाथ की पदयात्रा ने पश्चिमी यूपी में चुनावी चर्चाओं को तेज कर दिया है। अब भाजपा की नजर इस अभियान को सभी 71 सीटों तक पहुंचाने और पिछले चुनाव के नुकसान की भरपाई करने पर रहेगी।

