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UP Politics: ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर बोला बड़ा हमला, कहा- पहला ऐसा यादव नेता देखा जो अहीर-अहीर में भेद करता हो

UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बीच जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट लिखकर अखिलेश यादव पर निशाना साधा।

राजभर ने अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव को ‘गुड मॉर्निंग मित्र’ कहकर संबोधित किया। इसके बाद उन्होंने सपा प्रमुख पर जाति के अंदर भी भेदभाव करने का आरोप लगाया। राजभर ने तंज कसते हुए लिखा कि उन्होंने पहला ऐसा यादव नेता देखा है, जो अहीर-अहीर में भी अंतर करता है।

ओमप्रकाश राजभर बोले- अहीर समाज अब अखिलेश यादव का खेल समझने लगा है

कैबिनेट मंत्री ने अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि शायद वह अभी भी अपने सपनों की दुनिया में खोए हुए हैं, लेकिन गाय-भैंस की सेवा करने वाला अहीर समाज अब जाग चुका है। राजभर के मुताबिक, समाज के लोग अब अखिलेश यादव की राजनीति और उनके दांव-पेच को समझने लगे हैं।

उन्होंने आगे लिखा कि अब तक वह यही जानते थे कि अहीर दो तरह के होते हैं। एक भगवान श्रीकृष्ण को मानने वाले और दूसरे अखिलेश यादव तथा उनके सपाई। लेकिन अब उन्हें पता चला है कि अखिलेश यादव की नजर में अहीर समाज के भीतर भी 15 फीसदी और 85 फीसदी का बंटवारा है।

यादव समाज के 85 और 15 फीसदी वर्ग का उठाया मुद्दा

ओमप्रकाश राजभर ने अपनी पोस्ट में यादव समाज के भीतर ग्वाला और कमरिया समुदाय का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव 15 फीसदी कमरिया वर्ग को अपना मानते हैं, जबकि 85 फीसदी घोसी यानी ग्वाला समाज को वह तवज्जो नहीं देते।

राजभर ने कहा कि पहले उन्हें लगता था कि अखिलेश यादव सभी यादवों को एक नजर से देखते होंगे, लेकिन अब ऐसा नहीं लगता। उनके मुताबिक, सपा प्रमुख के लिए भी समाज के भीतर अपने और पराए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सभी लोग एक ही समाज से आते हैं तो उनके साथ अलग-अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है?

धर्म के बाद जाति और अब अहीर समाज में भेदभाव का लगाया आरोप

सुभासपा प्रमुख ने अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि पहले के नेताओं ने धर्म के नाम पर जनता को बांटा और अब अखिलेश यादव जाति के नाम पर समाज को बांट रहे हैं। राजभर ने आरोप लगाया कि अब बात अहीर समाज के भीतर भी भेदभाव तक पहुंच गई है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा पहला यादव नेता देखा है, जो अहीर-अहीर में दो आंख करता हो। राजभर का यह बयान यूपी की सियासत में जातीय समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ सकता है।

2017 से 2024 तक कितने ग्वाला और कमरिया को दिया टिकट? राजभर का सवाल

ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव से सीधे सवाल करते हुए पूछा कि 2017 से लेकर 2024 तक हुए चुनावों में समाजवादी पार्टी ने कितने घोसी यानी ग्वाला समाज के लोगों को टिकट दिया और कितने कमरिया समाज के नेताओं को चुनाव मैदान में उतारा?

उन्होंने अखिलेश यादव को जागने की नसीहत देते हुए दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में 85 फीसदी वाला ग्वाला समाज सपा को 2022 से भी बुरे दौर में पहुंचा सकता है। राजभर का यह बयान साफ तौर पर 2027 के चुनाव से पहले यादव समाज के भीतर जातीय प्रतिनिधित्व को लेकर सपा को घेरने की कोशिश माना जा रहा है।

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