You are currently viewing UP News: मनरेगा खत्म! 1 जुलाई से लागू हुई यह बड़ी योजना, जानें मजदूरों को क्या मिला बड़ा तोहफा?

UP News: मनरेगा खत्म! 1 जुलाई से लागू हुई यह बड़ी योजना, जानें मजदूरों को क्या मिला बड़ा तोहफा?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश की ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में आज यानी 1 जुलाई 2026 से एक ऐतिहासिक और बड़ा बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने करीब दो दशकों से ग्रामीण भारत में आजीविका का मुख्य आधार रहे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया है। अब इसकी जगह ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण’ (वीबी-जी राम जी) योजना को पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है। इस नए कानूनी और प्रशासनिक ढांचे का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना, रोजगार के नए अवसर पैदा करना और गांवों में स्थायी बुनियादी ढांचे का विकास करना है।

रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी

उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी ग्रामीण आबादी वाला राज्य है, जहां के लाखों गरीब परिवार अपनी आजीविका के लिए अब तक मनरेगा पर निर्भर थे। इस नई योजना (VB-G RAM G) के लागू होने से यूपी के ग्रामीण मजदूरों को सबसे बड़ा और सीधा लाभ मिलने जा रहा है। अब तक श्रमिकों को साल में अधिकतम 100 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलती थी, जिसे अब बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के समुचित और पारदर्शी कार्यान्वयन के लिए अपनी कमर कस ली है, ताकि हर पात्र परिवार तक इसका लाभ पहुंच सके।

न्यूनतम दैनिक मजदूरी में वृद्धि

नए बदलावों के तहत सरकार ने न केवल काम के दिन बढ़ाए हैं, बल्कि दैनिक मानदेय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। अब उत्तर प्रदेश में किसी भी ग्रामीण मजदूर को 300 रुपये प्रतिदिन से कम मजदूरी नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही, राष्ट्रीय स्तर पर औसत दैनिक मजदूरी भी 298.8 रुपये से बढ़कर अब 327.4 रुपये प्रतिदिन हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने श्रमिकों को यह बढ़ी हुई मजदूरी समय पर मुहैया कराने के लिए वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर सभी आवश्यक प्रबंध पहले से ही पूरे कर लिए हैं।

जियोस्पेशियल प्लानिंग और सैटेलाइट डेटा

‘वीबी-जी राम जी’ योजना का सबसे क्रांतिकारी पहलू इसकी कार्यप्रणाली में किया गया तकनीकी बदलाव है। पुराने ढर्रे के विपरीत, अब केवल स्थानीय या मैन्युअल मांग के आधार पर कार्यों को मंजूरी नहीं दी जाएगी। इसकी जगह अब जियोस्पेशियल प्लानिंग (भू-स्थानिक योजना) को अनिवार्य बनाया गया है। गांवों में विकास कार्यों की रूपरेखा सैटेलाइट डेटा, डिजिटल भूमि रिकॉर्ड और स्थानीय बुनियादी ढांचे की वास्तविक जरूरतों के आधार पर पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से तैयार की जाएगी। इसी वैज्ञानिक खाके के अनुसार यह तय होगा कि सरकारी धन किस क्षेत्र और किस कार्य पर खर्च होना है। अब गांवों में पहले से स्वीकृत इन वैज्ञानिक विकास योजनाओं के आधार पर ही श्रमिकों को काम आवंटित किया जाएगा।

Spread the love

Leave a Reply