Vande Mataram Row: महाराष्ट्र में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता और प्रवक्ता वारिस पठान ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी राष्ट्रगीत का सम्मान करती है, लेकिन इसकी कुछ पंक्तियों का पाठ इस्लाम की धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं है। पठान का कहना है कि किसी भी नागरिक पर राष्ट्रगीत का पाठ अनिवार्य करना संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा संवेदनशील विषय है।
राष्ट्रीय सम्मान संशोधन विधेयक 2026 और वंदे मातरम कानून पर बढ़ी बहस
वारिस पठान की यह प्रतिक्रिया उस समय सामने आई है, जब राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया गया है। प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को भी राष्ट्रगान की तरह कानूनी संरक्षण प्रदान करना है। इस प्रस्ताव के बाद राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों के बीच इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।
AIMIM का पक्ष: वंदे मातरम का सम्मान, लेकिन धार्मिक मान्यताओं का भी सम्मान जरूरी
समाचार एजेंसी से बातचीत में वारिस पठान ने कहा कि AIMIM राष्ट्रगीत का सम्मान करती है और देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कोई सवाल नहीं उठने देना चाहती। हालांकि उन्होंने कहा कि गीत की कुछ पंक्तियां ऐसी हैं, जिनका उच्चारण इस्लामी मान्यताओं के अनुसार उचित नहीं माना जाता। उनके अनुसार, धार्मिक आस्था के विरुद्ध किसी भी कार्य के लिए किसी समुदाय को बाध्य नहीं किया जा सकता।
धार्मिक स्वतंत्रता और अनुच्छेद 25 का हवाला
वारिस पठान ने कहा कि इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी अन्य की उपासना स्वीकार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रगीत की कुछ पंक्तियों का पाठ उनकी धार्मिक मान्यताओं के विपरीत माना जाता है। उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन करने की स्वतंत्रता प्राप्त है और इस अधिकार की रक्षा न्यायपालिका भी कर चुकी है।
वंदे मातरम अनिवार्य करने पर BJP और RSS पर लगाए आरोप
वारिस पठान ने कहा कि देश का सम्मान करना और राष्ट्रगीत का अनिवार्य रूप से पाठ करना दोनों अलग-अलग विषय हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर कुछ राजनीतिक दल लोगों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रगीत का पाठ नहीं करता, तो क्या उसे देशभक्ति के पैमाने पर परखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, देशभक्ति का मूल्यांकन केवल राष्ट्रगीत गाने के आधार पर नहीं किया जा सकता।
राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में अंतर बताया, AIMIM ने रखा अपना पक्ष
वारिस पठान ने कहा कि उनकी पार्टी राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का पूरा सम्मान करती है और उसका गायन करती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत की संवैधानिक स्थिति अलग-अलग है। उनके अनुसार, नागरिकों को राष्ट्रगीत का पाठ करने के लिए बाध्य करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की धार्मिक मान्यता इसके आड़े आती है, तो उसके संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।
देशभक्ति पर सवाल उठाने का किया विरोध
अपने बयान में वारिस पठान ने कहा कि राष्ट्रगीत की कुछ पंक्तियों का पाठ न करने वाले मुसलमानों को अक्सर अनुचित रूप से देशभक्ति पर सवालों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में मुस्लिम समुदाय के अनेक लोगों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया और अपने प्राणों की आहुति दी। उनके अनुसार, धार्मिक मान्यताओं का पालन करना और देश के प्रति निष्ठा रखना दो अलग-अलग विषय हैं, जिन्हें एक-दूसरे से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
राष्ट्रीय गीत पर बहस के बीच राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
राज्यसभा में प्रस्तावित संशोधन विधेयक के बाद वंदे मातरम को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। एक ओर सरकार राष्ट्रीय प्रतीकों को अधिक कानूनी संरक्षण देने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष और कुछ अन्य दल धार्मिक स्वतंत्रता तथा संवैधानिक अधिकारों का हवाला देते हुए इस पर अलग-अलग राय रख रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और राजनीतिक मंचों पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।

