Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और निर्णायक चरण के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है। सोमवार, 27 अप्रैल को प्रचार का शोर थमने के साथ ही अब गेंद जनता के पाले में है। राज्य की सत्ता का भविष्य तय करने वाले इस चरण में 142 सीटों पर मतदान होना है, जिसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
चुनावी शोर थमा और साइलेंस पीरियड की शुरुआत
सोमवार शाम होते ही पश्चिम बंगाल की गलियों और चौराहों पर जारी रैलियों और लाउडस्पीकरों का शोर शांत हो गया है। चुनाव आयोग के नियमानुसार अब 48 घंटे का ‘साइलेंस पीरियड’ (मौन अवधि) प्रभावी हो गया है। इस दौरान कोई भी उम्मीदवार या राजनीतिक दल जनसभा या प्रचार नहीं कर सकेगा। पहले चरण के भारी मतदान ने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है, और अब सबकी नजरें 29 अप्रैल को होने वाली वोटिंग पर टिकी हैं।
142 सीटों पर आर-पार की लड़ाई
दूसरे चरण का यह मतदान बेहद खास है क्योंकि इसमें राज्य की 294 सीटों में से करीब आधी यानी 142 सीटों पर फैसला होना है। कोलकाता और कलकत्ता प्रेसिडेंसी के शहरी बेल्ट को बंगाल की राजनीति का ‘नर्व सेंटर’ कहा जाता है। मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में ध्रुवीकरण, घुसपैठ और भ्रष्टाचार के मुद्दे हावी हैं, तो वहीं शहरी इलाकों में बंगाली अस्मिता और विकास के दावों के बीच कांटे की टक्कर है। विश्लेषकों का मानना है कि जो दल ‘भद्रलोक’ मतदाताओं को बूथ तक लाने में सफल रहेगा, वही सत्ता की चाबी हासिल करेगा।
एग्जिट पोल का इंतजार और समय सीमा
मतदान के साथ ही आम जनता और राजनीतिक गलियारों में ‘एग्जिट पोल’ (Exit Poll Results) को लेकर चर्चा तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग के सख्त दिशा-निर्देशों के अनुसार, जब तक आखिरी चरण का आखिरी वोट नहीं डल जाता, तब तक कोई भी सर्वेक्षण सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। 29 अप्रैल की शाम 6:00 बजे के बाद, जैसे ही वोटिंग प्रक्रिया समाप्त होगी, विभिन्न न्यूज़ चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एग्जिट पोल के आंकड़े आने शुरू हो जाएंगे, जो बंगाल के संभावित विजेता का संकेत देंगे।
4 मई को अंतिम चुनावी नतीजे
हालांकि एग्जिट पोल से हवा का रुख पता चलेगा, लेकिन बंगाल के इस ‘सियासी खेला’ का असली और सटीक परिणाम 4 मई को ही सामने आएगा। मतगणना के दिन स्पष्ट होगा कि बंगाल की जनता ने ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा जताया है या परिवर्तन की लहर ने नया इतिहास लिखा है। पहले चरण के अभूतपूर्व मतदान प्रतिशत ने मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है, जिससे हर दल की धड़कनें तेज हो गई हैं

