Women’s Reservation Bill: महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के लोकसभा में गिरने के बाद देश की राजनीति दो ध्रुवों में बंट गई है। जहाँ एक ओर कांग्रेस इसे अपनी जीत बता रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इसे विपक्ष की महिला विरोधी मानसिकता का प्रमाण करार दिया है। शनिवार (18 अप्रैल, 2026) को कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने मोर्चा संभाला और कांग्रेस के ‘जश्न’ पर कड़े सवाल खड़े किए।
महिला आरक्षण संशोधन बिल की विफलता
लोकसभा में शुक्रवार को नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़ा संशोधन विधेयक अपेक्षित बहुमत न मिलने के कारण गिर गया। कांग्रेस पार्टी ने इस विधायी विफलता को केंद्र सरकार की रणनीतिक हार बताया। प्रियंका गांधी ने प्रस्ताव रखा कि परिसीमन का इंतज़ार करने के बजाय लोकसभा की वर्तमान सदस्य संख्या के भीतर ही आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। कांग्रेस के इस रुख ने संसदीय गतिरोध को और गहरा कर दिया है।
स्मृति ईरानी का कांग्रेस पर निशाना
कांग्रेस के दावों का जवाब देते हुए बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने कहा कि देश की महिलाओं को दशकों से सुनहरे सपने दिखाए गए, लेकिन जब उन्हें राजनीतिक अधिकार सुरक्षित करने का मौका आया, तो कांग्रेस ने उसे कुचल दिया। ईरानी ने तंज कसते हुए कहा कि कल संसद में महिलाओं की आकांक्षाओं का गला घोंटा गया और कांग्रेस नेता मेजें थपथपाकर इसका जश्न मना रहे थे। उनके अनुसार, यह बिल का गिरना केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि करोड़ों महिलाओं की राजनीतिक जागृति पर प्रहार है।
कांग्रेस शासन के छह दशक बनाम बीजेपी का जेंडर बजट फ्रेमवर्क
स्मृति ईरानी ने कांग्रेस के शासनकाल की याद दिलाते हुए कहा कि देश की महिलाएं यह कभी नहीं भूलेंगी कि उन्हें बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के राज में 11 करोड़ महिलाएं शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा को तरसती रहीं। स्मृति ने दावा किया कि बीजेपी-एनडीए सरकार ने ही पहली बार जेंडर बजट फ्रेमवर्क पेश किया और 25 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खुलवाकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया।
संसद में महिलाओं की गरिमा और 33 प्रतिशत कोटे पर छिड़ी जंग
स्मृति ईरानी ने कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस को ‘पाखंड’ का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि संघर्षरत महिलाएं केवल 33 प्रतिशत आरक्षण और अपने हक की मांग कर रही थीं, लेकिन विपक्ष ने उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाकर इसे केवल सत्ता के संघर्ष तक सीमित कर दिया। ईरानी ने सवाल उठाया कि एक ओर कांग्रेस 2023 के बिल का समर्थन करने की बात करती है, तो दूसरी ओर संवैधानिक परिसीमन समिति और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर अविश्वास जताती है।
संवैधानिक व्यवस्था पर अविश्वास और कांग्रेस का ‘क्रूर चेहरा’ बेनकाब
अपने संबोधन के अंत में स्मृति ईरानी ने कड़े शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी को न तो देश की संसद पर भरोसा है और न ही देश की महिलाओं पर। उन्होंने प्रियंका गांधी के बयानों को विरोधाभासी बताते हुए कहा कि कांग्रेस का असली और क्रूर चेहरा अब देश के सामने आ गया है। बीजेपी नेता के अनुसार, कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को केवल एक ‘वोट बैंक’ समझा है, जबकि बीजेपी के लिए यह समानता और न्याय की लड़ाई है।

