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UP News: आजम खान और अब्दुल्ला आजम को बड़ा झटका! कोर्ट ने खारिज की अपील, 7 साल की जेल की सजा बरकरार

UP News: उत्तर प्रदेश की राजनीति के कद्दावर नेता और समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य आजम खान (Azam Khan) और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम (Abdullah Azam) की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रामपुर की एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने सोमवार को इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए दोनों नेताओं की अपील को खारिज कर दिया। इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें दो पैन कार्ड रखने के जुर्म में दोषी पाते हुए सात-सात साल के कारावास की सजा सुनाई थी। सेशन कोर्ट के इस फैसले के बाद अब इन सपा नेताओं (SP Leaders) को फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे ही वक्त गुजारना होगा, जिससे उनके समर्थकों को बड़ी निराशा हाथ लगी है।

डबल पैन कार्ड मामला

यह पूरा विवाद साल 2019 में शुरू हुआ था, जब आजम खान और उनके पुत्र पर नियम विरुद्ध तरीके से दो अलग-अलग पैन कार्ड (PAN Card Fraud) बनवाने का संगीन आरोप लगा था। जांच में पाया गया कि जन्मतिथि और अन्य विवरणों में हेरफेर कर आर्थिक लाभ और चुनावी लाभ के लिए दोहरी पहचान का इस्तेमाल किया गया। इसी दोहरे पैन कार्ड केस में नवंबर 2025 में एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए दोनों को न केवल जेल भेजा, बल्कि प्रत्येक पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अभियोजन पक्ष ने दलीलों में इसे संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा कानून का खुला उल्लंघन करार दिया था।

जेल ही रहेगा ठिकाना

मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश के बाद से ही आजम खान और अब्दुल्ला आजम रामपुर जेल (Rampur Jail) में निरुद्ध हैं। उन्होंने इस फैसले को चुनौती देते हुए ऊपरी अदालत (सेशन कोर्ट) में गुहार लगाई थी, लेकिन वहां से राहत की उम्मीदें टूट गई हैं। अब आजम खान के अधिवक्ता इस कानूनी लड़ाई को उच्च न्यायालय ले जाने की योजना बना रहे हैं। माना जा रहा है कि आगामी दिनों में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सजा पर रोक लगाने की मांग की जाएगी। गौरतलब है कि आजम खान सितंबर 2025 में ही रिहा हुए थे, लेकिन अदालती कार्यवाही (Court Proceedings) के चलते 55 दिनों के भीतर ही उन्हें फिर से सलाखों के पीछे जाना पड़ा।

समाजवादी पार्टी को झटका

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आहट के बीच आजम खान जैसे दिग्गज चेहरे का जेल में रहना समाजवादी पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है। आजम खान का अपने क्षेत्र और मुस्लिम मतदाताओं के बीच गहरा प्रभाव रहा है। इस न्यायिक झटके (Judicial Setback) के कारण पार्टी का क्षेत्रीय समीकरण प्रभावित हो सकता है। विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार के विरुद्ध न्याय की जीत बता रहे हैं, वहीं सपा इस पूरी कार्रवाई को राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित बताकर जनता के बीच जाने की रणनीति बना रही है। फिलहाल, जेल से बाहर आने का आजम परिवार का इंतजार लंबा होता दिख रहा है।

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