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Noida Voilence : नोएडा हिंसा पर सीपी लक्ष्मी सिंह का कड़ा एक्शन! डीसीपी शैव्या गोयल और एसीपी हटाए गए, जांच में जुटी एसटीएफ

Noida Voilence : नोएडा में हाल ही में हुई श्रमिक हिंसा और कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने सख्त रुख अपनाया है। सीपी ने तत्काल प्रभाव से नोएडा सेंट्रल के डीसीपी शैव्या गोयल (DCP Shaivya Goyal) और एसीपी उमेश कुमार (ACP Umesh Kumar) को उनके पदों से हटा दिया है। इस प्रशासनिक फेरबदल (Administrative Reshuffle) के तहत डीसीपी ट्रैफिक शैलेंद्र कुमार सिंह को सेंट्रल जोन का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई ड्यूटी में लापरवाही और हिंसा को समय रहते न रोक पाने के चलते की गई है। कमिश्नरेट में हुए इस बड़े बदलाव से पुलिस महकमे में खलबली मच गई है।

शैव्या गोयल का छोटा कार्यकाल

2021 बैच की तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी शैव्या गोयल को 1 अप्रैल 2026 को ही सेंट्रल नोएडा और साइबर सुरक्षा (Cyber Security) की कमान मिली थी। हालांकि, जिम्मेदारी संभालने के महज 19 दिनों के भीतर ही उन्हें पद से हटा दिया गया। इससे पहले शैव्या गोयल ने नारकोटिक्स और साइबर जैसे महत्वपूर्ण विभागों में सक्रिय भूमिका निभाई थी। हाल ही में घरेलू कामगारों के वेतन से जुड़े वायरल वीडियो मामले में भी वह चर्चा में रही थीं। अब उनकी जगह डीसीपी ट्रैफिक शैलेंद्र कुमार सिंह यातायात प्रबंधन के साथ-साथ सेंट्रल जोन की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करेंगे।

13 अप्रैल का हिंसक घटनाक्रम

नोएडा में हिंसा की शुरुआत 13 अप्रैल को हुई थी, जब विभिन्न फैक्ट्रियों के हजारों श्रमिकों ने वेतन बढ़ाने और अपनी अन्य मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन (Protest) शुरू किया था। देखते ही देखते यह आंदोलन उग्र हो गया और कई इलाकों में आगजनी, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। हिंसक प्रदर्शनों के कारण नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ और सार्वजनिक संपत्ति को निशाना बनाया गया। इस घटना ने नोएडा पुलिस की खुफिया तंत्र और त्वरित प्रतिक्रिया टीम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके बाद अब बड़े अधिकारियों पर गाज गिरी है।

साजिश का पर्दाफाश

नोएडा हिंसा की जांच कर रही टीमों ने इस पूरे मामले में एक गहरी साजिश का खुलासा किया है। पुलिस प्रवक्ता विजय कुमार गुप्ता के अनुसार, इस हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद था, जो लगातार यूट्यूबर हिमांशु ठाकुर के संपर्क में था। जांच में सामने आया है कि हिमांशु ठाकुर श्रमिकों के मुद्दों पर सक्रिय रहता था और वीडियो कॉल के जरिए उन्हें भड़काने का काम कर रहा था। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार हिमांशु ठाकुर उच्च शिक्षा प्राप्त है और वह ‘आकृति’ नामक युवती के जरिए इस संगठन से जुड़ा था। पुलिस, एसटीएफ और खुफिया एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही हैं।

गिरफ्तारी और कानूनी प्रक्रिया

पुलिस ने इस मामले में अब तक आदित्य आनंद, आकृति और हिमांशु ठाकुर समेत कई महत्वपूर्ण आरोपियों को हिरासत (Arrest) में ले लिया है। पुलिस के अनुसार, इन गिरफ्तारियों से हिंसा के पीछे छिपे सिंडिकेट और उनकी फंडिंग की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिलेगी। गिरफ्तार किए गए आरोपियों को सोमवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा। नोएडा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून तोड़ने वालों और शांति व्यवस्था बिगाड़ने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल, पूरे सेंट्रल जोन में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है।

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