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Ayodhya: अयोध्या में अक्षय तृतीया की धूम, रामलला को लगा 56 भोग, स्वर्ण मुकुट से दमक उठी रामनगरी

Ayodhya: सनातन परंपरा के सबसे शुभ और फलदायी पर्व ‘अक्षय तृतीया’ पर सोमवार को धर्मनगरी अयोध्या पूरी तरह भक्ति, उल्लास और अटूट श्रद्धा के रंग में सराबोर दिखी। उदया तिथि की शास्त्रीय मान्यता के अनुसार, शहर के प्रतिष्ठित मठ-मंदिरों में यह पर्व उल्लासपूर्वक मनाया गया। विशेष रूप से भव्य राम मंदिर में विराजमान रामलला के दर्शन के लिए भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

रामलला का पंचामृत अभिषेक और स्वर्णिम आभा

अक्षय तृतीया के पावन मुहूर्त पर श्री राम जन्मभूमि मंदिर में विराजमान रामलला का विशेष शृंगार किया गया। उत्सव की शुरुआत प्रभु के दिव्य पंचामृत अभिषेक के साथ हुई, जिसके बाद उन्हें अत्यंत आकर्षक सोने का मुकुट धारण कराया गया। स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित प्रभु की मनमोहक छवि ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस शुभ दिन पर मंदिर परिसर में चारों ओर जय श्री राम के उद्घोष गूँजते रहे।

रामलला को 56 प्रकार के व्यंजनों का महाभोग

भक्ति की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब दोपहर के समय प्रभु रामलला को 56 प्रकार के व्यंजनों का भव्य भोग अर्पित किया गया। गर्मी के मौसम को देखते हुए विशेष रूप से शीतल पेय पदार्थों का प्रबंध किया गया था। भोग में विविध प्रकार के पकवानों, ताजे फलों और मिष्ठान के साथ-साथ सत्तू का शरबत, लस्सी, जूस और विभिन्न शीतल शरबत शामिल रहे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया पर सत्तू और शीतल वस्तुओं का दान व अर्पण अक्षय पुण्य प्रदान करता है।

हनुमंतलला का भव्य शृंगार और सुंदरकांड पाठ

सिर्फ राम मंदिर ही नहीं, बल्कि अयोध्या की पौराणिक पीठ नाका हनुमानगढ़ी में भी उत्सव की भव्यता देखते ही बनी। महंत रामदास के सानिध्य में हनुमंतलला का दिव्य शृंगार किया गया और उन्हें प्रिय लड्डुओं का भोग लगाया गया। इसी क्रम में विद्याकुंड स्थित वीर भगवान मंदिर में सामूहिक सुंदरकांड का पाठ आयोजित हुआ। पंडित कौशल्यानंदन के अनुसार, पाठ के पश्चात उपस्थित भारी संख्या में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया।

मां अन्नपूर्णा की आकर्षक झांकी और दुर्गा काली दरबार

परिक्रमा मार्ग पर स्थित दुर्गा काली दरबार में महंत सूर्यानंद के नेतृत्व में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। यहाँ मां अन्नपूर्णा की एक अत्यंत भव्य और आकर्षक झांकी सजाई गई, जिसने भक्तों का ध्यान खींचा। मां को विशेष पकवानों का भोग लगाने के साथ ही सुंदरकांड का सस्वर पाठ किया गया। अयोध्या के अन्य छोटे-बड़े मंदिरों में भी दान-पुण्य और भजन-कीर्तन के दौर चलते रहे, जो देर शाम तक जारी रहे।

साकेत भवन में राष्ट्र कल्याण हेतु विशेष अनुष्ठान

अक्षय तृतीया के अवसर पर साकेत भवन मंदिर में आध्यात्मिक और सामाजिक सरोकार का संगम देखने को मिला। आचार्य प्रवीण शर्मा के संयोजन में 11 वैदिक विद्वानों ने राष्ट्र कल्याण और विश्व शांति के संकल्प के साथ श्री सूक्त, पुरुष सूक्त और श्रीराम रक्षा स्तोत्र का सस्वर पाठ किया। आचार्य शर्मा ने पर्व की महत्ता बताते हुए कहा कि इस दिन किया गया जप, तप और दान कभी क्षय नहीं होता। उन्होंने संदेश दिया कि यदि समाज धर्म और सेवा के मार्ग पर चले, तभी विश्व में वास्तविक शांति संभव है।

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