UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर हलचल तेज होती दिख रही है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और अपनी जनता पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की हैं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दो तस्वीरें पोस्ट की हैं। पहली तस्वीर में वह वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ नजर आ रहे हैं। दूसरी तस्वीर में उनके साथ उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के अलावा राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी दिखाई दे रहे हैं।
स्वामी प्रसाद मौर्य की कांग्रेस नेताओं से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल
स्वामी प्रसाद मौर्य की कांग्रेस नेताओं से इस मुलाकात को उत्तर प्रदेश की आगामी विधानसभा राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अगर मौर्य कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के करीब आते हैं तो इंडिया अलायंस के मौजूदा समीकरणों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
यह घटनाक्रम समाजवादी पार्टी के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार पुराने गठबंधन को आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में मिलकर चुनाव लड़ा था और अब विधानसभा चुनाव में भी इसी गठबंधन को जारी रखने के संकेत दिए जा रहे हैं।
2022 में बीजेपी छोड़कर सपा में आए थे स्वामी प्रसाद मौर्य
स्वामी प्रसाद मौर्य लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थामा था। उस समय उनके सपा में शामिल होने को यूपी की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना गया था।
हालांकि विधानसभा चुनाव के बाद मौर्य और सपा के रास्ते अलग हो गए। उन्होंने अखिलेश यादव का साथ छोड़कर अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बना ली। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ उनकी मुलाकात ने एक बार फिर उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाओं को हवा दे दी है।
ऊंचाहार सीट पर फंस सकता है सपा और स्वामी प्रसाद मौर्य का पेंच
सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य कांग्रेस या गठबंधन के जरिए ऊंचाहार विधानसभा सीट से अपने लिए या अपने बेटे के लिए टिकट की मांग कर सकते हैं। यही मुद्दा आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे के समीकरण को प्रभावित कर सकता है।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ऊंचाहार सीट पर पहले से ही अपनी रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी की नजर योगी सरकार में मंत्री रहे और मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में प्रभाव रखने वाले मनोज पांडेय के खिलाफ मजबूत उम्मीदवार उतारने पर है। ऐसे में यदि मौर्य परिवार इस सीट पर दावेदारी करता है तो गठबंधन के भीतर सीट को लेकर खींचतान की स्थिति बन सकती है।
संघमित्रा मौर्य को लेकर भी उठे सवाल
स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य फिलहाल भारतीय जनता पार्टी में हैं। वह वर्ष 2019 में भाजपा के टिकट पर बदायूं लोकसभा सीट से सांसद चुनी गई थीं। हालांकि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसके बावजूद वह अभी भाजपा में बनी हुई हैं।
अब स्वामी प्रसाद मौर्य की कांग्रेस नेताओं से मुलाकात के बाद राजनीतिक चर्चा इस बात पर भी केंद्रित है कि क्या इसका असर संघमित्रा मौर्य के राजनीतिक भविष्य पर पड़ेगा। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पिता के संभावित नए राजनीतिक समीकरणों के बाद संघमित्रा मौर्य भाजपा में रहेंगी या भविष्य में कोई अलग फैसला लेंगी।
यूपी चुनाव से पहले गठबंधन की राजनीति पर नजर
स्वामी प्रसाद मौर्य की राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात को फिलहाल उनके अगले राजनीतिक कदम के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस के साथ उनके औपचारिक रूप से जुड़ने या गठबंधन में शामिल होने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में गठबंधन और सीट बंटवारे की राजनीति धीरे-धीरे तेज हो रही है। ऐसे में मौर्य की कांग्रेस नेताओं के साथ तस्वीरें सामने आने के बाद यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या वह एक बार फिर नए राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा बनेंगे और यदि ऐसा होता है तो सपा-कांग्रेस गठबंधन और यूपी की चुनावी रणनीति पर इसका कितना असर पड़ेगा।

