UP Politics: लंबे समय से सक्रिय राजनीति की चर्चाओं से दूर रहे गोपीकृष्ण पांडेय को भाजपा द्वारा राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद उनका नाम अचानक सुर्खियों में आ गया है। उनके राजनीतिक सफर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), बजरंग दल और हिंदू जागरण मंच से जुड़ी उनकी भूमिका का जिक्र हो रहा है। हालांकि, इस बीच उनके साथ जुड़ी करीब 25 साल पुरानी ‘गदर’ फिल्म की कहानी सबसे ज्यादा चर्चा में है।
2001 में कानपुर में संघ का कार्यक्रम और ‘गदर’ से जुड़ा किस्सा
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2001 में कानपुर में संघ का एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित हुआ था, जिसमें देशभर से प्रचारक पहुंचे थे। उस समय गोपीकृष्ण पांडेय कानपुर के आचार्य नगर इलाके में रहते थे। इसी दौरान संघ के एक वरिष्ठ प्रचारक, जो आज देश की राजनीति के शीर्ष नेताओं में शामिल हैं, उनके घर ठहरे थे। बताया जाता है कि उस समय उनके बाल काफी बढ़ गए थे, इसलिए घर पर ही नाई बुलाकर बाल कटवाए गए। इसके बाद स्नान और भोजन के बाद अगले दिन होने वाली बैठक की तैयारी हुई।
शाम का समय खाली था तो दोनों साथ बाहर निकले। बातचीत के दौरान उस समय चर्चित फिल्म ‘गदर’ का जिक्र आया। इसके बाद दोनों फिल्म देखने चले गए। यही पुराना प्रसंग अब गोपीकृष्ण पांडेय को राज्यसभा टिकट मिलने के बाद दोबारा चर्चा में आ गया है। खुद गोपीकृष्ण पांडेय ने भी इस पुराने घटनाक्रम की पुष्टि की है।
राज्यसभा टिकट पर गोपीकृष्ण पांडेय ने जताया भरोसा
राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद गोपीकृष्ण पांडेय ने कहा कि भाजपा में लंबे समय तक संघर्ष और सेवा करने वाले कार्यकर्ताओं को अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है, उसके लिए वह आभार व्यक्त करते हैं। पांडेय ने कहा कि वह कानपुर और उत्तर प्रदेश की जनता के लिए हमेशा उपलब्ध रहेंगे और विकास के कार्यों में अपना योगदान देने का प्रयास करेंगे।
भाजपा ने इसी महीने होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए अपने 10 में से आठ प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं। पार्टी ने कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की 52 विधानसभा सीटों को ध्यान में रखते हुए कानपुर से तीन नेताओं को मैदान में उतारा है। इनमें प्रकाश पाल, श्रुति गंगवार और गोपीकृष्ण पांडेय शामिल हैं।
कानपुर से तीन भाजपा प्रत्याशियों के जरिए साधा जातीय और क्षेत्रीय समीकरण
भाजपा के तीनों प्रत्याशियों की सामाजिक पृष्ठभूमि को लेकर भी राजनीतिक विश्लेषण शुरू हो गया है। प्रकाश पाल और श्रुति गंगवार ओबीसी वर्ग से आते हैं, जबकि गोपीकृष्ण पांडेय सामान्य वर्ग से हैं। उपलब्ध जनगणना संबंधी आंकड़ों के आधार पर सेंट्रल यूपी में ओबीसी वर्ग की आबादी करीब 40 से 45 प्रतिशत मानी जाती है, जबकि सामान्य वर्ग की हिस्सेदारी करीब 30 से 35 प्रतिशत बताई जाती है। सामान्य वर्ग में ब्राह्मण समुदाय की संख्या भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अगले साल प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के इस चयन को सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि यह पहला अवसर है जब कानपुर से भाजपा के सिंबल पर तीन नेताओं को राज्यसभा के लिए प्रत्याशी बनाया गया है।
प्रकाश पाल का संघ से भाजपा तक लंबा संगठनात्मक सफर
कानपुर दक्षिण के बर्रा क्षेत्र में रहने वाले करीब 60 वर्षीय प्रकाश पाल ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में की थी। वह करीब 36 वर्षों से संघ से जुड़े हुए हैं। संगठन में उन्होंने करीब तीन वर्ष तक पूर्णकालिक तहसील प्रचारक के तौर पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने संघ से सीधे भाजपा संगठन में प्रवेश किया और पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई।
12 साल की उम्र में संघ से जुड़े थे गोपीकृष्ण पांडेय
गोपीकृष्ण पांडेय का संघ से जुड़ाव भी काफी पुराना है। आचार्य नगर और वर्तमान में बारादेवी क्षेत्र में रहने वाले पांडेय महज 12 वर्ष की उम्र में स्वयंसेवक के रूप में संघ से जुड़ गए थे। इसके बाद उन्होंने बजरंग दल और हिंदू जागरण मंच जैसे संगठनों में काम किया। संगठन में सक्रियता के चलते वर्ष 1998 में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया।
उनका यह लंबा संगठनात्मक सफर अब राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद फिर चर्चा में है। खासतौर पर 2001 का वह प्रसंग, जब वह तत्कालीन संघ प्रचारक के साथ ‘गदर’ फिल्म देखने गए थे, राजनीतिक गलियारों में उनके पुराने संपर्कों और संगठनात्मक यात्रा के संदर्भ में चर्चा का विषय बना हुआ है।
श्रुति गंगवार का भी कानपुर से जुड़ा है मजबूत रिश्ता
भाजपा की राज्यसभा प्रत्याशियों की सूची में शामिल श्रुति गंगवार का संबंध भी कानपुर दक्षिण से है। उनकी ससुराल बर्रा-2 में बताई जाती है। श्रुति गंगवार की शादी सत्यनारायण सचान के बेटे सुबोध सचान से हुई है, जो नोएडा में नौकरी करते हैं। उनके राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद स्थानीय स्तर पर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. वीना आर्या पटेल ने सत्यनारायण सचान के घर पहुंचकर उन्हें बधाई दी। इस तरह भाजपा ने कानपुर से तीन प्रत्याशियों के जरिए संगठनात्मक अनुभव, सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय जुड़ाव—तीनों को साधने की कोशिश की है। अब राज्यसभा चुनाव के साथ-साथ इन नियुक्तियों को आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

