UP News: विश्व प्रसिद्ध कालीन नगरी भदोही के नाम को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिले का नाम दोबारा संत रविदास नगर किए जाने की घोषणा की है। तीन दशक से अधिक समय में जिले के नाम में कई बार बदलाव हो चुका है।
भदोही या संत रविदास नगर? फिर चर्चा में आया जिले का नाम
उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी भदोही एक बार फिर अपने नाम को लेकर चर्चा में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 29 जुलाई 2026 को वाराणसी में संत रविदास की 650वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रम में घोषणा की कि भदोही को फिर से संत रविदास नगर के नाम से जाना जाएगा।
इस घोषणा के साथ ही जिले के नाम को लेकर पिछले करीब तीन दशकों का राजनीतिक इतिहास एक बार फिर चर्चा में आ गया है। दरअसल, 1994 में अलग जिला बनने के बाद से भदोही का नाम कई बार बदला गया। अलग-अलग सरकारों के फैसलों के साथ कभी संत रविदास नगर नाम सामने आया तो कभी पुराना नाम भदोही बहाल किया गया।
आइए जानते हैं, 1994 से 2026 तक कब-कब बदला भदोही का नाम।
1994: मुलायम सिंह यादव सरकार में बना भदोही जिला
भदोही पहले वाराणसी जिले का हिस्सा था। लंबे समय से अलग जिला बनाए जाने की मांग के बाद 30 जून 1994 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकार ने भदोही को वाराणसी से अलग कर नया जनपद बनाया।
नए जिले का नाम भदोही रखा गया। कालीन उद्योग के लिए पहले से ही देश-दुनिया में पहचान रखने वाले इस क्षेत्र को अलग जिला बनने के बाद प्रशासनिक रूप से भी नई पहचान मिली।
1994 में पहली बार भदोही एक अलग जनपद के रूप में अस्तित्व में आया।
1997: मायावती सरकार में नाम हुआ संत रविदास नगर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के साथ जिले के नाम में भी बदलाव हुआ।
4 दिसंबर 1997 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की सरकार ने भदोही का नाम बदलकर संत रविदास नगर कर दिया।
इसके बाद सरकारी दस्तावेजों और प्रशासनिक इस्तेमाल में संत रविदास नगर नाम प्रमुखता से सामने आने लगा। यह नाम संत रविदास की सामाजिक और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ा गया।
1999: ‘संत रविदास नगर भदोही’ हुआ नाम
नाम बदलने का सिलसिला यहीं नहीं रुका।
12 नवंबर 1999 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्ता की भाजपा सरकार में जिले का नाम ‘संत रविदास नगर भदोही’ किया गया।
यानी संत रविदास नगर नाम को बरकरार रखते हुए उसके साथ भदोही भी जोड़ दिया गया।
उपलब्ध रिपोर्टों में इस बदलाव को कालीन निर्यातकों और कारोबारियों की मांग से भी जोड़ा गया। भदोही की अंतरराष्ट्रीय पहचान मुख्य रूप से कालीन उद्योग से जुड़ी होने के कारण ‘भदोही’ नाम को बनाए रखने की मांग सामने आती रही।
2014: अखिलेश यादव सरकार में फिर सिर्फ ‘भदोही’
इसके बाद एक बार फिर सत्ता बदली और जिले के नाम में भी परिवर्तन हुआ।
6 दिसंबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में संत रविदास नगर का नाम बदलकर फिर भदोही करने का फैसला लिया गया।
सरकारी प्रवक्ता के हवाले से उस समय बताया गया था कि नाम परिवर्तन का निर्णय जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिश पर लिया गया।
इस फैसले के बाद जिले की आधिकारिक पहचान फिर भदोही हो गई।
नाम बदलने के फैसले पर तत्कालीन विपक्षी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि सपा सरकार ने संत रविदास नगर का नाम हटाकर संत रविदास का अपमान किया।
2020: मायावती ने फिर नाम बदलने का वादा किया था
भदोही नाम बहाल होने के बाद भी यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रहा।
2020 में मायावती ने कहा था कि यदि उत्तर प्रदेश में बीएसपी की सरकार बनती है तो भदोही का नाम फिर से संत रविदास नगर किया जाएगा।
उन्होंने तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार पर आरोप लगाया था कि उसने राजनीतिक और जातिगत मानसिकता के कारण संत रविदास नगर का नाम बदलकर भदोही किया।
हालांकि, यह मायावती का राजनीतिक आरोप था, इसलिए इसे उनके बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
2026: योगी आदित्यनाथ ने फिर की संत रविदास नगर की घोषणा
अब करीब 12 साल बाद जिले का नाम एक बार फिर बदलने की घोषणा हुई है।
29 जुलाई 2026 को वाराणसी में संत रविदास की 650वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भदोही को फिर से संत रविदास नगर के नाम से जाना जाएगा।
मुख्यमंत्री ने 2014 में हुए नाम परिवर्तन का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा और कहा कि सरकार जिले को उसका पुराना नाम वापस दिलाने की दिशा में काम करेगी।
हालांकि, मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब वास्तविक प्रशासनिक प्रक्रिया और अधिसूचना के बाद ही नाम परिवर्तन आधिकारिक रूप से प्रभावी होगा।
अखिलेश यादव बोले- नाम बदलना अच्छी बात, विचार भी अपनाएं
योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि भदोही का नाम बदलकर संत रविदास नगर किया जाना अच्छी बात है, लेकिन केवल नाम बदलने से बात पूरी नहीं होती। संत रविदास के विचारों को पढ़ना और उन्हें अपनाना भी जरूरी है।
अखिलेश ने सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए।
मायावती ने किया फैसले का स्वागत
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने योगी सरकार की घोषणा का स्वागत किया।
उन्होंने सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि संत रविदास नगर नाम की बहाली संत रविदास के अनुयायियों और बहुजन समाज की भावनाओं का सम्मान है।
मायावती ने यह भी याद दिलाया कि 2014 में सपा सरकार के दौरान संत रविदास नगर का नाम बदलकर भदोही किया गया था।
32 साल में ऐसे बदलता रहा नाम
30 जून 1994 — भदोही अलग जनपद बना
4 दिसंबर 1997 — भदोही का नाम बदलकर संत रविदास नगर हुआ
12 नवंबर 1999 — नाम हुआ संत रविदास नगर भदोही
6 दिसंबर 2014 — नाम फिर बदलकर भदोही किया गया
29 जुलाई 2026 — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिर संत रविदास नगर नाम किए जाने की घोषणा की
क्यों खास है भदोही?
भदोही की पहचान सिर्फ एक जिले के तौर पर नहीं बल्कि दुनिया के प्रमुख कालीन उत्पादन और निर्यात केंद्रों में से एक के रूप में रही है। यहां का कालीन उद्योग देश की अर्थव्यवस्था और उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसी वजह से ‘भदोही’ नाम की अपनी एक अलग वैश्विक पहचान है। दूसरी ओर संत रविदास का नाम सामाजिक समानता, भक्ति और समरसता की परंपरा से जुड़ा हुआ है।
यही कारण है कि जिले के नाम को लेकर होने वाला हर बदलाव प्रशासनिक फैसले से आगे बढ़कर राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक बहस का विषय बन जाता है।

