Bihar New CM: बिहार की राजनीति में आज का दिन ऐतिहासिक और नाटकीय मोड़ लेकर आया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज मंगलवार, 14 अप्रैल को अपने पद से त्यागपत्र देने जा रहे हैं। राज्य में सत्ता का समीकरण तो एनडीए (NDA) के पक्ष में ही रहेगा, लेकिन नेतृत्व की कमान पूरी तरह बदलने वाली है। 15 अप्रैल को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होना तय है, हालांकि नए मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सस्पेंस अभी भी बरकरार है।
लोकतंत्र और संविधान की हत्या का आरोप
बिहार कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेता राजेश राठौड़ ने कहा कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती के पावन अवसर पर भाजपा ने बिहार में लोकतांत्रिक मूल्यों की बलि चढ़ा दी है। विपक्ष का आरोप है कि जनता द्वारा चुने गए मुख्यमंत्री को सत्ता से बेदखल करना जनादेश का अपमान है। कांग्रेस के अनुसार, यह कदम केवल राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया है, जिससे संवैधानिक मर्यादाएं तार-तार हुई हैं।
मोदी-शाह की जोड़ी पर निशाना और ‘थोपे हुए मुख्यमंत्री’ का जिक्र
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बिहार को मिलने वाला नया नेतृत्व पूरी तरह से दिल्ली दरबार यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की पसंद का होगा। राजेश राठौड़ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि आज बिहार पर एक ‘थोपा हुआ मुख्यमंत्री’ बैठाया जाएगा। विपक्षी खेमे का तर्क है कि अंबेडकर जयंती के दिन इस तरह का बदलाव करना यह दर्शाता है कि सत्तासीन नेतृत्व खुद को संविधान से ऊपर मानता है। नए नेता के नाम की घोषणा शाम तक होने की प्रबल संभावना है।
सीएम आवास पर सरगर्मी और निशांत कुमार को मनाने की कोशिशें
एक तरफ जहां नए मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ नीतीश कुमार के आवास पर बैठकों का दौर जारी है। पार्टी के दिग्गज नेता संजय झा, ललन सिंह और विजय कुमार चौधरी सुबह से ही सक्रिय हैं। सूत्रों के अनुसार, जेडीयू के ये शीर्ष नेता नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को कैबिनेट में शामिल करने के लिए मनाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, निशांत ने फिलहाल सक्रिय राजनीति और सरकार का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है।
बिहार मंत्रिमंडल का नया स्वरूप और 15 अप्रैल का शपथ ग्रहण समारोह
कल यानी बुधवार को बिहार की नई कैबिनेट का स्वरूप सबके सामने आ जाएगा। भाजपा और सहयोगी दलों के बीच मंत्रियों के विभागों के बंटवारे को लेकर भी चर्चाएं अंतिम दौर में हैं। जहां एक ओर विपक्ष इसे ‘संविधान विरोधी’ बता रहा है, वहीं एनडीए इसे बिहार के विकास के लिए एक नई शुरुआत मान रहा है। अब सबकी नजरें राजभवन पर टिकी हैं कि नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सत्ता की चाबी किसके हाथ में सौंपी जाती है।
अंबेडकर जयंती पर सियासी संग्राम और भविष्य की चुनौतियां
संविधान निर्माता बाबा साहेब की जयंती के दिन हुए इस बड़े उलटफेर ने बिहार की राजनीति को एक नई दिशा दे दी है। एक ओर जहां सत्ता पक्ष इसे ‘नेतृत्व परिवर्तन’ कह रहा है, वहीं विपक्षी गठबंधन इसे आगामी चुनावों के मद्देनजर भाजपा की सोची-समझी रणनीति करार दे रहा है। नए मुख्यमंत्री के सामने न केवल अपनी पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी, बल्कि विपक्ष के इन गंभीर आरोपों का जवाब देने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर होगी।

