अयोध्या: अयोध्या स्थित रामजन्मभूमि परिसर में रविवार को शरद पूर्णिमा का पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर रामलला की विशेष पूजा की गई और उन्हें आकर्षक तरीके से सजाया गया। पूरे आयोजन में धार्मिक परंपराओं का ध्यान रखा गया। पर्व के खास मौके पर मध्यरात्रि में रामलला को खीर का भोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर में कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती गई।
संध्या आरती के बाद उत्तरी चबूतरे पर विराजे रामलला
राम मंदिर में शरद पूर्णिमा का मुख्य आयोजन संध्या आरती के बाद शुरू हुआ। राम मंदिर के धार्मिक व्यवस्था प्रमुख इंद्रदेव मिश्र के मुताबिक, आरती पूरी होने के बाद रामलला के चल विग्रह को गर्भगृह से बाहर लाया गया। इसके बाद उन्हें गर्भगृह के बाहर बने उत्तरी चबूतरे पर विराजमान कराया गया। इसी स्थान पर पर्व से जुड़े विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। आधी रात को भगवान को विशेष खीर अर्पित की गई। इसके साथ ही पारंपरिक पदगायन हुआ, जिससे मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना रहा।
चंद्रमा की 16 कलाओं से जुड़ी है शरद पूर्णिमा की मान्यता
शरद पूर्णिमा को हिंदू धर्म में खास पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणों में अमृत बरसने की मान्यता है। इसी विश्वास के आधार पर शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखी जाती है। माना जाता है कि चांदनी में रखने के बाद इस खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करना शुभ होता है। रामलला को भी इसी परंपरा के तहत खीर का भोग लगाया गया। हर साल की तरह इस बार भी मंदिर में शरद पूर्णिमा का आयोजन पारंपरिक तरीके से किया गया।
राम मंदिर के ट्रस्ट पदाधिकारी और अर्चक रहे मौजूद
शरद पूर्णिमा के धार्मिक कार्यक्रम में राम मंदिर से जुड़े कई प्रमुख लोग शामिल हुए। इनमें ट्रस्टी महंत दिनेंद्रदास, डॉ. निर्मला यादव, मंदिर के सीईओ सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र और अर्चक प्रमुख आचार्य केशव शर्मा शामिल रहे। इनके साथ रामलला की पूजा-अर्चना करने वाले कई अर्चक, ट्रस्ट के कर्मचारी और सुरक्षा से जुड़े अधिकारी भी मौजूद थे। सभी की उपस्थिति में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। मंदिर परिसर में पर्व को लेकर उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला।
राम मंदिर परिसर में महर्षि वाल्मीकि जयंती की तैयारी पूरी
शरद पूर्णिमा के बाद अब सोमवार को रामजन्मभूमि परिसर में महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई जाएगी। इसके लिए परिसर में स्थित वाल्मीकि मंदिर की भव्य सजावट कराई गई है। कार्यक्रम में वाल्मीकि समाज के संतों, खास प्रतिनिधियों और राम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख लोगों को आमंत्रित किया गया है। इस आयोजन की जिम्मेदारी ट्रस्टी डॉ. निर्मला यादव के नेतृत्व में निभाई जाएगी। महर्षि वाल्मीकि जयंती के मौके पर मंदिर परिसर में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाएगी।

