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PM Modi Address to the Nation: पीएम मोदी के संबोधन पर सुप्रिया श्रीनेत का पलटवार “29 मिनट के भाषण में 58 बार कांग्रेस का नाम, असली मुद्दों से भाग रही सरकार”

PM Modi Address to the Nation: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद देश का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का पूरा संबोधन केवल चुनावी राजनीति और विपक्ष को कोसने पर केंद्रित था, जबकि देश की जनता उनसे ज्वलंत समस्याओं पर जवाब की उम्मीद कर रही थी।

संबोधन में विपक्षी दलों का जिक्र और मुद्दों से भटकाव

सुप्रिया श्रीनेत ने प्रधानमंत्री के भाषण का विश्लेषण करते हुए कहा कि उनके 29 मिनट के संबोधन में 58 बार कांग्रेस पार्टी का जिक्र किया गया। उन्होंने इसे ‘मुद्दों से ध्यान भटकाने की रणनीति’ करार दिया। श्रीनेत के अनुसार, जब प्रधानमंत्री के पास अपनी उपलब्धियां बताने के लिए कुछ नहीं होता, तब वे विपक्षी दलों को निशाना बनाकर असल सवालों से बचने की कोशिश करते हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार को महिला अधिकारों और सामाजिक न्याय जैसे गंभीर विषयों पर ठोस कार्ययोजना पेश करनी चाहिए, न कि केवल राजनीतिक बयानबाजी।

महिला आरक्षण विधेयक और नेतृत्व के अवसर

महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि महिलाओं को सांकेतिक सम्मान नहीं, बल्कि वास्तविक अधिकार चाहिए। उन्होंने मांग की कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में से तुरंत एक-तिहाई यानी 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जानी चाहिए। श्रीनेत ने सीधा आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री इस दिशा में त्वरित कदम इसलिए नहीं उठा रहे क्योंकि उन्हें डर है कि इससे सत्ताधारी दल के पुरुष नेताओं की सीटों पर संकट आ जाएगा। उनके अनुसार, परिसीमन की शर्त लगाकर आरक्षण को भविष्य के लिए टालना महिलाओं के साथ एक बड़ा धोखा है।

भाजपा में महिला प्रतिनिधित्व के आंकड़े और सशक्तिकरण के दावे

बीजेपी के महिला सशक्तिकरण के दावों पर सवाल उठाते हुए सुप्रिया श्रीनेत ने कुछ आंकड़े पेश किए। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा में भाजपा के केवल 12.9 प्रतिशत सांसद महिलाएं हैं, जो कि विकसित लोकतंत्र के लिहाज से बेहद कम है। इतना ही नहीं, देश भर की विधानसभाओं में भाजपा का महिला प्रतिनिधित्व 10 प्रतिशत से भी नीचे है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो पार्टी अपने संगठन और सदन के भीतर महिलाओं को पर्याप्त स्थान नहीं दे पा रही, वह पूरे देश की महिलाओं के उद्धार की बात कैसे कर सकती है?

महिला सुरक्षा, मणिपुर और हाथरस जैसे मामलों पर चुप्पी

कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश की बेटियों के साथ हाथरस और मणिपुर जैसी हृदयविदारक घटनाएं हुईं, तब प्रधानमंत्री की चुप्पी ने सबको हैरान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया हमेशा कमजोर और पक्षपाती रही है। श्रीनेत के अनुसार, राष्ट्र के नाम संबोधन में इन संवेदनशील मुद्दों पर कोई जवाबदेही तय नहीं की गई, जो सरकार की महिला विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।

परिसीमन की राजनीति और जाति जनगणना से दूरी

लेख के अंत में सुप्रिया श्रीनेत ने सरकार की ‘असली मंशा’ को उजागर करने का दावा किया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण की आड़ में सरकार वास्तव में परिसीमन (Delimitation) को आगे बढ़ाना चाहती है ताकि राजनीतिक समीकरणों को अपने पक्ष में साधा जा सके। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ‘जाति जनगणना’ (Caste Census) की मांग से बचने के लिए महिलाओं के अधिकारों को ढाल बना रही है। श्रीनेत ने चेतावनी दी कि सरकार की यह रणनीति अब जनता के सामने बेनकाब हो चुकी है और इसकी साख लगातार गिर रही है।

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