लखनऊ: राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में बाढ़ और जलभराव की समस्या गंभीर हो गई है। हजारों लोगों को घर छोड़ना पड़ा है, जबकि कई अन्य परिवार पानी भरे इलाकों में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। करीब दस दिन बाद भी प्रभावित क्षेत्रों में राहत की चुनौती बनी हुई है। गोमती नगर विस्तार, इकाना स्टेडियम और पलासियो मॉल के आसपास पानी भरने से सड़कें डूब गई हैं। कई जगह नावों से लोगों की आवाजाही के दृश्य सामने आए हैं।
इकाना स्टेडियम और पलासियो मॉल में दोबारा भरा पानी
गोमती नगर विस्तार के सेक्टर-7 में इकाना स्टेडियम और पलासियो मॉल के आसपास गुरुवार सुबह जलभराव की समस्या फिर बढ़ गई। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की टीम ने रातभर पानी निकालने का प्रयास किया था। लेकिन सुबह करीब आठ बजे पानी रोकने के लिए बंद कराया गया नाला दोबारा टूट गया। इससे इकाना स्टेडियम, पलासियो मॉल, आपदा प्रबंधन विभाग, मर्क्योर होटल और टेंडर पाम हॉस्पिटल के आसपास पानी फिर फैलने लगा।
नाला टूटने के बाद एलडीए का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी पानी में डूब गया। स्थिति बिगड़ने पर एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार और सचिव सुशील प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने टूटे हिस्से को मिट्टी और बोल्डर डालकर बंद कराया, ताकि पानी को दूसरे इलाकों में फैलने से रोका जा सके।
26 पंप लगाकर शुरू की गई पानी की निकासी
जलभराव से प्रभावित इलाकों में राहत देने के लिए एलडीए ने पानी निकालने का अभियान तेज किया। इसके लिए 26 पंप लगाए गए। नाले के टूटे हिस्से को बंद करने के बाद पानी की निकासी शुरू की गई, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में जलस्तर कम करने का प्रयास हुआ। हालांकि, लगातार पानी भरने और निकासी में आ रही दिक्कतों के कारण हालात चुनौतीपूर्ण बने रहे।
11 साल से अधूरा है गोमती किनारे सुरक्षा बांध
गोमती की बाढ़ से हुए नुकसान के बीच सुरक्षा बांध के निर्माण में देरी का मामला सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गोमती नगर विस्तार के सेक्टर-7 से इकाना स्टेडियम की ओर करीब 2.5 किलोमीटर लंबा बांध बनाने की योजना वर्ष 2012-13 में तैयार की गई थी। इसके लिए एलडीए ने 36 करोड़ रुपये भी उपलब्ध कराए थे। बताया गया है कि सिंचाई विभाग ने वर्ष 2015 में टेंडर जारी किया, लेकिन इसके बाद भी निर्माण शुरू नहीं हो सका।
बांध समय पर बन जाता तो नदी का पानी आबादी वाले इलाकों तक पहुंचने से रोकने में मदद मिल सकती थी। अब बाढ़ के कारण कई महत्वपूर्ण इलाकों में जलभराव होने के बाद इस योजना में देरी पर सवाल उठ रहे हैं।
बांध निर्माण शुल्क नहीं देने वाले बिल्डरों को नोटिस
जलभराव के बाद एलडीए ने नदी किनारे विकसित आवासीय योजनाओं और बांध निर्माण की व्यवस्था की समीक्षा की। जांच में सामने आया कि कई बिल्डरों ने सुरक्षा बांध के निर्माण के लिए तय शुल्क पूरा जमा नहीं किया है। एलडीए के अनुसार, नदी के आसपास विकसित आवासीय योजनाओं की सुरक्षा के लिए बांध बनाया जाना था, लेकिन शुल्क जमा नहीं होने से निर्माण प्रभावित हुआ।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने अधिकारियों को बकाया रकम वसूलने के लिए वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) जारी करने के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर संबंधित बिल्डरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। इस कार्रवाई का उद्देश्य बकाया शुल्क की वसूली और सुरक्षा बांध के निर्माण से जुड़े मामलों को आगे बढ़ाना है।
कई बड़े संस्थान और आवासीय सोसायटियां जलभराव की चपेट में
गोमती का जलस्तर बढ़ने से इकाना स्टेडियम और पलासियो मॉल के अलावा पुलिस मुख्यालय, सरसावां, आईटी सिटी, ट्रिपल आईटी, एचसीएल और आसपास की कई आवासीय टाउनशिप प्रभावित हुई हैं। कई सोसायटियों के बेसमेंट और निचले हिस्सों में पानी भर गया। इसके कारण कुछ परिवारों को होटल और रिश्तेदारों के घरों में शरण लेनी पड़ी। सड़कों पर पानी भरने से यातायात और रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हुए।
बांध निर्माण में देरी से उठे जवाबदेही के सवाल
लखनऊ में बाढ़ और जलभराव की स्थिति ने सुरक्षा बांध के निर्माण, विभागों के बीच तालमेल और समय पर कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए हैं। एक ओर प्रभावित इलाकों से पानी निकालने का काम जारी है, वहीं दूसरी ओर बांध निर्माण में देरी और बकाया शुल्क की वसूली का मामला सामने आया है। अब लोगों को राहत देने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है, ताकि भविष्य में गोमती का जलस्तर बढ़ने पर ऐसे हालात से बचा जा सके।

